अगर आपके पास शक्ति है तो उसका इस्तेमाल कुछ अतिरिक्त प्रयास के साथ दूसरों को सशक्त करने में होना चाहिए

भगवान न करे कि ऐसा बुरा किसी के साथ हो, खासतौर पर युवाओं के साथ जो महत्वाकांक्षाओं से भरे होते हैं। लेकिन हमें बुरे से बुरी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। कल्पना कीजिए कि एक छात्र ने कड़ी मेहनत से अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी की जो उसके करिअर को आकार देने वाली है। वह परीक्षा के लिए तैयार है और परीक्षा से एक-दो दिन पहले ही उसे पता चले कि उसका कोविड-19 टेस्ट पॉजीटिव आया है तो उसकी परेशानी की कल्पना कीजिए। क्या आप छात्र के बिखरते सपनों को देख सकते हैं? स्वाभाविक है कि वह छात्र परीक्षा में नहीं बैठ सकता।

सभी कोविड पॉजीटिव छात्र केरल की 17 वर्षीय लड़की सैंड्रा बाबू की तरह खुशकिस्मत नहीं हो सकते। आपको याद होगा कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद केरल राज्य जल परिवहन विभाग ने परीक्षा के दिनों में इस अकेली लड़की के लिए 70 सीटर नाव, अपने पूरे कर्मचारियों के साथ चलाई थी। जब सैंड्रा एचएससी परीक्षा देती थी तो नाव उसके लौटने का इंतजार करती थी और उसे समय पर घर पहुंचाती थी ताकि वह अगली परीक्षा की तैयारी कर सके।

संयोग से, अहमदाबाद के 21 वर्षीय ध्रुव सांचनिया को भी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन (आईआईटीई) की परीक्षा देने मिली लेकिन उससे पहले उसे और उसके परिवार को तनाव से गुजरना पड़ा। प्रवेश परीक्षा एक बीएड कॉलेज में एडमिशन के लिए थी। उसके परिवार पर मानो पहाड़ टूट पड़ा जब 31 जुलाई को वह कोरोना पॉजीटिव पाया गया। उसे एक होस्टल में अस्थायी रूप से बनाए गए कोविड सेंटर में बिना लक्षण वाले व्यक्ति के रूप में भर्ती किया गया। मुसीबत में भी राहत की बात यह थी कि ध्रुव की परीक्षा 2 अगस्त को थी। यानी उसके पास अधिकारियों को बताने के लिए दो दिन थे और अधिकारियों के पास भी कुछ समय था कि वे सोच सकें कि ध्रुव को परीक्षा में शामिल कैसे करवाया जाए। ध्रुव ने रविवार को होने वाली परीक्षा के लिए बहुत मेहनत की थी। और वह यह भी जानता था कि अगर वह परीक्षा में रविवार को नहीं बैठ पाया तो उसे किसी सेल्फ-फाइनेंस्ड कॉलेज में एडमिशन लेना होगा या उसका एक साल बर्बाद हो सकता है।

जैसे सैंड्रा ने राज्य जल परिवहन के अधिकारियों को परेशानी बताकर मदद मांगी थी, ध्रुव ने भी अपनी कोविड-19 पॉजीटिव रिपोर्ट 31 जुलाई को आईआईटीई अधिकारियों को भेजी। आईआईटीई वीसी, हर्षद पटेल के ऑफिस ने अपने डेटाबेस में ध्रुव की उम्मीदवारी जांचकर अधिकारियों से गुजरात परीक्षा बोर्ड से बातकर कोई समाधान निकालने को कहा। वे स्वास्थ्य अधिकारियों से मशविरे के साथ ध्रुव के स्वास्थ्य की निगरानी के समाधान पर पहुंचे।

इस रविवार पूरा नया शेड्यूल बनाया गया। अधिकारी एक अलग सीलबंद लिफाफे में परीक्षा पत्र लाए, जो कोविड सेंटर की मेडिकल टीम को दिया गया। टीम ने पेपर ध्रुव को दिए जो अलग कमरे में परीक्षा देने का इंतजार कर रहा था। कोविड केयर सेंटर परीक्षा केंद्र से 4 किमी दूर था। चूंकि ध्रुव की सेहत परीक्षा देने लायक थी, इसलिए उसने किसी भी अन्य प्रतियोगी की तरह परीक्षा दी, जिनकी थर्मल स्कैनिंग हुई और जिन्हें फेस शील्ड भी दिए गए।

फंडा यह है कि अगर आपके पास शक्ति है तो उसका इस्तेमाल कुछ अतिरिक्त प्रयास के साथ दूसरों को सशक्त करने में होना चाहिए। क्योंकि शक्तिहीन को सशक्त होने की जरूरत है।

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