अगर आप तकनीक में निपुण हैं और नई भूमिकाएं जोड़ने को तैयार हैं, तो 2021 में आपको नए पदनाम मिल सकते हैं

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

वे दिन गए जब बच्चे ट्यूशन टीचर की मदद लेते थे। वे अब अपने ट्यूशन टीचर को ‘प्रोडक्टिविटी फ्रेंड्स’ (उत्पादकता मित्र) कहेंगे। इसे यह समझकर नकार मत दीजिएगा कि यह एक सजावटी नाम वाला बदलाव है। पूरा खेल, मेरा मतलब इन नए पदनाम वाले पेशेवरों का काम करने का तरीका बदल जाएगा।

यह नया पदनाम इसलिए है क्योंकि वे सिर्फ शिक्षक नहीं हैं, वे न सिर्फ स्कूल पाठ्यक्रम पूरा करने और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में मदद करेंगे, बल्कि छात्रों के साथ संगीत सुनेंगे, डीजे बनेंगे और उनकी पसंद के हर खेल के बारे में बात करेंगे। एक प्रोडक्टिविटी फ्रेंड किसी बच्चे से बॉस्केटबॉल की, तो किसी बच्चे से फुटबॉल या क्रिकेट के बारे में बात करने में भी निपुण होगा।

जैसे इतना काफी नहीं था, ये नए पदनाम वाले ट्यूशन टीचर सोशल मीडिया से भी वाकिफ हैं और बच्चे के साथ पीएस-4 कम्प्यूटर गेम खेलने को भी तैयार रहेंगे। कुलमिलाकर ये प्रोडक्टिविटी फ्रेंड बच्चों की पसंद की बातें करेंगे, उनके साथ घनिष्ठता बढ़ाएंगे और इन सबसे उनकी पढ़ाई मजेदार बनाकर धीरे-धीरे बच्चों को उनकी सर्वोच्च उत्पादकता तक पहुंचाएंगे। ज्यादातर छात्र जानते हैं कि क्या सीखना है, लेकिन कैसे पढ़ना है, यह समझने में भटक जाते हैं। इन नए ट्यूशन टीचर्स को प्रोडक्टिविटी फ्रेंड्स कहें या स्टडी बडीज़, वे आपके बच्चे की पढ़ाई का स्मार्ट, तेज और प्रभावशाली तरीका तलाशने में मदद के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। और यही जीवनभर का सबक है।

इसीलिए कंपनियां अब युवा और तकनीक में निपुण ग्रेजुएट्स को नौकरी दे रही हैं, जो छात्रों की न सिर्फ पढ़ाई और होमवर्क खत्म करने में, बल्कि असली जिंदगी की कई परीक्षाएं पास करने में भी मदद करें, जो स्कूल के बाहर होती हैं।

ऐसा ही म्यूजिक आर्टिस्ट के साथ है। उनमें से कुछ सिर्फ संगीतकार नहीं हैं, बल्कि बहुत अच्छे म्यूजिक थैरेपिस्ट भी हैं। देशभर के गंभीर कोविड मरीजों का इलाज कर रहा चेन्नई का एमजीएम हेल्थकेयर 25 व 26 दिसंबर को अपने खुले प्रांगण में लाइव म्यूजिक सेशन आयोजित करेगा। चूंकि पांचों इंद्रियों में सुनने की क्षमता सर्वश्रेष्ठ है, इसलिए हॉस्पिटल अधिकारियों को लगता है कि संगीत कई मरीजों के लिए कारगर रहा है, जिनसे उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

यूके के नौकरी गवां चुके शिक्षकों, कोच, कॉलेज छात्रों और डे-केयर वर्कर्स का उदाहरण भी देखें। चूंकि कोविड का फैलाव नियंत्रण से बाहर हो गया है, लंदन लॉकडाउन में है और बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, इटली और नीदरलैंड ने अपनी फ्लाइट्स रोक दी हैं, ऐसे में कई माता-पिता चाहते हैं कि जब वे घर के काम कर रहे हों तो बच्चों को आया संभालें। चूंकि कोई आवागमन नहीं कर सकता, कई लोगों ने ‘वर्चुअल बेबीसिटर्स’ नाम की नई नौकरी शुरू की है।

वे बच्चों के पीछे भागने वाले, गंदगी साफ करने वाले या बनावटी खेल खेलने वाले नहीं हैं। बल्कि वे टीवी या लैपटॉप के सामने एक घंटे का सेशन देते हैं, जिसमें एक छोटा हैलो, चैट, कुछ कहानियां, कविताएं सुनाने के समय के अलावा काउंटिंग, खेल, संगीत आदि शामिल होते हैं। पूरा घंटे बच्चा सक्रिय रहता है और हर दिन वर्चुअल आया अपना सेशन किसी मशहूर गाने पर नाचते हुए खत्म करता है। जब बच्चे एक कमरे में व्यस्त रहते हैं, पैरेंट्स को अधूरे काम करने का मौका मिल जाता है, फिर वह रोजमर्रा के काम हों या बॉस के साथ जरूरी मीटिंग।

फंडा यह है कि अगर आप तकनीक में निपुण हैं और नई भूमिकाएं जोड़ने को तैयार हैं, तो 2021 में आपको नए पदनाम मिल सकते हैं।

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