अगर हम नेतृत्वकर्ता हैं, तो हमें कुछ निजी पसंद त्यागनी होंगी और प्रोटोकॉल का पालन करना होगा

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु।

इस शनिवार क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने घोषणा की कि वह भारतीय बोर्ड के साथ जांच करेगा कि क्या पांच भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों ने नए साल की शाम बायो बबल सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया।

इस घोषणा का 7 जनवरी से सिडनी में शुरू हो रहे तीसरे टेस्ट में भारत की योजना पर असर पड़ सकता है। क्योंकि इनमें उप-कप्तान रोहित शर्मा समेत पृथ्वी शॉ, शुभम गिल, ऋषभ पंत और नवदीप सैनी शामिल हैं। मेलबर्न के एक रेस्त्रां में कैमरे में कैद हुए इन खिलाड़ियों को बाकी टीम से अलग रहने कहा गया है।

यह अलग बात है कि क्या वाकई में इस गलत काम के लिए खिलाड़ियों को दोष दिया जा सकता? क्योंकि मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के न्यूरोसाइंटिस्ट्स ने हाल ही में पाया कि जिन लोगों को अकेले रहने के लिए मजबूर किया जाता है, उन्हें हमेशा सामाजिक संवाद की भूख रहती है, जैसे किसी भूखे को खाने की इच्छा होती है।

उन्होंने 10 घंटों के लिए कुछ लोगों को अकेले, जबकि कुछ को भूखा रखा। सभी की दिमागी गतिविधि स्कैन करने पर पाया गया कि उनका सब्सटेंशिया निग्रा उसके लिए तरस रहा था, जो उन्हें नहीं मिला। दिमाग के मध्य स्थित इस संरचना ने सभी लोगों में समान सिग्नल दिए।

लेकिन क्या ऐसा शोध हमारे क्रिकेटरों की हरकत को सही ठहराता है? मैं नहीं जानता कि हम आम लोगों की इसपर क्या राय है, खासतौर पर कोविड के समय में। लेकिन विज्ञापनदाता इसे जरूर याद रखेंगे जिससे खिलाड़ियों की आय प्रभावित होगी।

आपको याद है, कुछ वर्ष पहले खुद को ‘ठंडा-ठंडा तेल’ बताने वाले हेयर ऑइल ने एक बॉलीवुड अभिनेता से विज्ञापन छीन लिया था क्योंकि उसने गुस्से में किसी को सार्वजनिक रूप से चाटा मार दिया था।

इसी तरह 1974 में हमारी भारतीय टीम इंग्लैड गई थी, जिसे भुलाना मुश्किल है। वहां दुकान से सामान चुराने की शर्मनाक घटना हुई, जिसमें एक क्रिकेटर ने मोजे चुराए थे। तब हमारी टीम ने लॉर्ड्स मैदान पर सबसे कम 42 रन बनाए थे। कुछ दिनों बाद खिलाड़ी तत्कालीन हाई कमिश्नर की पार्टी में लेट पहुंचे।

हाई कमिश्नर ने यह कहकर भारतीय कप्तान को नीचा दिखाया कि ‘तुम लोग न सिर्फ बुरे क्रिकेटर हो, बल्कि बुरे मेहमान भी हो।’ हालांकि, तब खिलाड़ियों की गलती नहीं थी क्योंकि उन्हें लगातार तीन कार्यक्रमों में जाना पड़ा था। विडंबना है कि हमारी मौजूदा टीम उस स्कोर को और नीचे लाकर, 36 पर ऑल आउट हो चुकी है।

आज सोशल मीडिया की वजह से ज्यादा सशक्त फैन्स हैं। इसीलिए हमारे स्पोर्ट्स हीरोज को याद रखना होगा कि प्रोटोकॉल के पालन में उनकी छोटी-सी गलती भी गैर-जरूरी ध्यान आकर्षित कर सार्वजनिक आलोचना करवा सकती है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले सामान्य प्रशासन विभाग का उदाहरण देखें, जिसने आदतन देर से आने वालों पर चाबुक चलाया है, जिनमें ब्यूरोक्रेट भी शामिल हैं। कई बार हम ब्यूरोक्रेट के ऑफिस जाते हैं और चपरासी कहता है, ‘साहब/मैडम अभी नहीं आए/आई’। लेकिन अब सरकार ने कर्मचारियों को पाबंदी सिखाने का फैसला लिया है।

चूंकि सरकार के काम पर हमेशा जनता की नजर रहती है, इसीलिए वह ऑफिस लेट आने जैसी छोटी गलतियों के कारण छवि खराब नहीं कर सकती।

फंडा यह है कि अगर हम नेतृत्वकर्ता हैं, तो हमें अच्छा लगे या न लगे, पर कुछ निजी पसंद त्यागनी होंगी और प्रोटोकॉल का उच्च अनुशासन के साथ पालन करना होगा क्योंकि यह हमसे ही शुरू होता है।

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