अपने थोड़े से प्रयासों और अलग सोच से आप निकल सकते हैं दुनिया की तमाम समस्याओं का हल

लॉकडाउन में हम सबने वायुप्रदूषण में कमी और फिर अनलॉक होते ही प्रदूषण बढ़ते हुए देखा। अब हम जानते हैं कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। पर कई लोगों को नहीं पता कि महामारी के दौरान प्लास्टिक प्रदूषण चरम सीमा पर पहुंच गया है। सिंगल यूज एप्रिन से लेकर पानी की बोतल तक यह सूची अंतहीन है।

हाल ही जारी रिपोर्ट के अनुसार समुद्र में सालाना प्लास्टिक कचरा फेंकने में अगले 20 सालों में तीन गुना तक की वृद्धि हो जाएगी, यह दुनिया भर के समुद्र किनारों पर प्रति मीटर 50 किलो प्लास्टिक कचरा बढ़ा सकता है। हालांकि इमसें 80% तक कमी आ सकती है, बशर्ते हम ना सिर्फ प्लास्टिक का उत्पादन कम करें बल्कि प्लास्टिक की रिसाइकलिंग और विकल्प भी ढूंढें। यहां इसके कुछ अनोखे आइडिया हैं। स्माइल इबोन को मछली पकड़ने के लिए नावों की जरूरत महसूस हुई। उसने पढ़ा था कि इंसानों को प्लास्टिक बॉटल्स की लत है। पूरी दुनिया में हर मिनट लोग 10 लाख से ज्यादा बॉटल खरीदते हैं और उनमें से कई बॉटल रिसाइकल होने के बजाय समुद्र में मिल जाती हैं। कैमरून का सबसे बड़ा शहर दओआला और निकटवर्ती शहर क्रिबी पर्यटन के सहारे हैं और कई लोग लोग नावों से सुदूर इलाकों में जाते हैं।

अचानक उसे कचरे में पड़ी बॉटल से ‘पर्यावरण अनुकूल डोंगी’(नाव) बनाने का आइडिया आया। उसने अपना सारा पैसा गैरलाभकारी संस्था ‘मदिबा एंड नेचर’ शुरू करने में लगा दिया, यह पूरे इलाके से प्लास्टिक कचरा इकट्‌ठा करने और इकोटूरिज़्म व मछुआरों के लिए नाव बनाने का काम करने लगी।

इसके बाद उन्होंने कचरा इकट्‌ठा करने, अलग करने और उसे रिसाइकल करने के लिए देश का पहला इकोबिन बनाया। अगर आप इसका वीडियो देखें, तो प्लास्टिक की नाव देखकर चकित रह जाएंगे क्योंकि हमें लकड़ी या अन्य किसी धातु की नाव देखने की आदत है। मबिदा एंड नेचर की वेबसाइट के मुताबिक उन्होंने ग्रीन बिजनेस सिखाने के लिए छात्रों और इंजीनियर्स के लिए प्रोग्राम शुरू किया है और पर्यावरण जागरूकता व शैक्षणिक प्रोग्राम भी विकसित किया है। फिलीपींस में एक कैफे दुनियाभर के हजारों लोगों को प्लास्टिक स्ट्रॉ के बजाय पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। फिलीपींस के सुरिगाओ देल नोर्ते स्थित कैफे एदिता की मैनेजर सारा त्यू ने अपने रेस्तरां में प्लास्टिक स्ट्रॉ के स्थान पर नारियल के पत्तों को रोल करके, इस सस्ते और बायोडिग्रेडेबल विकल्प का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

37 साल की रेस्तरां संचालक को पहली बार स्ट्रॉ का आइडिया स्थानीय दुकान से एक ड्रिंक आर्डर करने के दौरान आया, जब वह अपने परिवार के साथ दक्षिणी फिलीपींस स्थित कैसोलियन द्वीप पर छुटि्टयां मनाने के लिए गईं थीं। सारा अपनी ड्रिंक में ‘लुके’ (नारियल के पत्तों का स्थानीय शब्द) से बने स्ट्रॉ को देखकर चौंक गई थी। तब उन्होंने रेस्तरां के मैनेजर से इसे बनाने की कला सिखाने का आग्रह किया और अपने रेस्तरां में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

अपने सोशल साइट पेज के जरिए वह इस कला को समुद्र तटों और जलीय निकायों के पास स्थित कई वैश्विक रेस्तरां संचालकों को सिखाती है। अपने उत्पादों को प्लास्टिक में लपेटने के बजाय चियांग माइ, थाइलैंड के रिमपिंग सुपरमार्केट ने फलों और सब्जियों को केले के पत्तों में लपेटकर बेचना शुरू कर दिया है, बिल्कुल उसी तरह जैसे 60-70 के दशक में हमें सामान मिलता था। फंडा यह है कि अपने थोड़े से प्रयासों और अलग सोच से हम प्लास्टिक प्रदूषण समेत दुनिया की तमाम समस्याओं का हल निकाल सकते हैं।

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