अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिद्वंद्वियों और अनपेक्षित साझेदारों से हाथ मिलाएं

कम से कम मैं चार ऐसे युवाओं को जानता हूं, जिन्होंने अपनी शादी की तारीख आगे बढ़ा दी है और परिस्थितियों के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि महज 50 लोगों की मौजूदगी में वह शादी नहीं कर सकते इसलिए वे सब परिस्थितियों के सामान्य होने तक इंतजार करना चाहते हैं। सबकुछ फरवरी 2020 के पहले वाली स्थिति जैसा हो जाएगा या नहीं ऐसा सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन अब दुनिया मानने लगी है कि शादियां तो अब नए अवतार में ही करनी पड़ेगी।

मेरे हिसाब से नए अवतार में, सरकार द्वारा लागू 50 लोगों का नियम तोड़े बिना भी आपकी शादी में सैकड़ों लोग शामिल हो सकते हैं! इसके अलावा, सभी शादी के समय एक ही तरह का खाना भी खा सकते हैं! सुनने में अटपटा लग रहा है? वेडिंग प्लानर्स तो पहले ही इस विचार पर आधा काम कर चुके हैं। कई कैटरिंग युनिट्स द्वारा शादियों की लाइव स्ट्रीमिंग अब पुरानी बात हो गई है। अब यह करना जरूरी भी हो गया है। इसमें नई बात यह है कि अब ये कैटरिंग यूनिट्स छोटी-छोटी टीम में बंटकर उन वर्चुअल मेहमानों के घरों पर खाना परोस रही हैं, ताकि ये गेस्ट दूर से सिर्फ शादी न देेखें बल्कि उस लज़ीज़ खाने का भी लुत्फ उठाएं, जो यहां शादी हॉल में शामिल 50 वीवीआईपी मेहमानों को परोसा जा रहा है! यहां इसकी सच्ची कहानी है।

पिछले हफ्ते केरल में कोट्टयम के नजदीक एक सगाई समारोह में मनोज माडावसेरिल ने कैटरिंग की थी। समारोह में शामिल 50 लोगों के अलावा मनोज ने 15 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 70 मेहमानों के घरों में वही दावत का खाना परोसा। समारोह की लाइव स्ट्रीमिंग करने के अलावा, हॉल में परोसा गया हरेक आइटम उन सब वर्चुअल मेहमानों को भी परोसा गया, जितने कि उस क्षेत्र में रहने वाले मेहमानों की मनोज ने गारंटी दी थी। अब ये कैटरर्स अपने बिजनेस को एक कदम आगे बढ़ाते हुए न सिर्फ अलग-अलग शहरों में रहने वाले मेहमानों के लिए बल्कि अलग अलग राज्यों में रहने वाले मेहमानों के लिए भी कैटरिंग की सुविधा देना चाहते हैं।

इसके लिए वे राज्य की कैटरिंग समितियों के जरिए देशभर के कैटरर्स से टाइअप करना चाहते हैं। जिस व्यक्ति को शादी का अनुबंध मिलेगा वह ‘गिग मैनेजर’ (महामारी के बाद यह शब्द बहुत ज्यादा प्रचलित हुआ है, जहां एक व्यक्ति किसी प्रोजेक्ट का प्रमुख होता है और अलग-अलग क्षेत्रों का काम पूरा कराने के लिए वह दूसरे लोगों से अनुबंध कर लेता है।) बन जाएगा और जहां भी दूल्हा-दुल्हन के रिश्तेदार या दोस्त होंगे, वहां के कैटरर्स से अनुबंध कर लेगा। इसका मतलब है कि भले ही मेहमान तीन हजार किलोमीटर दूर हों, लेकिन शादी के दिन वह उस जोड़े की ओर से दावत खा सकेंगे। समारोह के बाद वह वही खाने का लुत्फ उठा सकते हैं, यहां तक कि अगर पहले से तय है तो अपनी पसंद का खाना भी खा सकते हैं।

केरल में कैटरिंग युनिट चलाने वाले गीजन मैथाइस एक बहुत ही इनोवेटिव आइडिया के साथ आए हैं। उनकी युनिट चिकन और मीट के लिए ग्रेवी उपलब्ध करा रही है, जिसे वह पोल्ट्री और मीट की दुकानों के जरिए बेच रहे हैं। लोगों को सिर्फ इसमें मीट के साथ नमक डालकर उबालना होता है। अब वह फिश करी की ग्रेवी बेचने का विचार कर रहे हैं और लोगों से अच्छी-खासी प्रतिक्रियाएं भी मिल रही हैं।

फंडा यह है कि अब समय आ गया है कि अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिद्वंद्वियों और अनपेक्षित साझेदारों से भी हाथ मिलाना पड़ेगा।
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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