अपने शहर से प्यार है, तो इसे खोजें और अपनी विरासत के विशेषज्ञ बन जाएं

अपने शहर से प्यार है, तो इसे खोजें और अपनी विरासत के विशेषज्ञ बन जाएं

काम के सिलसिले में बहुत ज्यादा यात्रा करना आम है, कम से कम मेरे लिए तो यह सच है। लेकिन, विदेश और देश के भीतर यात्रा करते वक्त जो बड़ा फर्क मुझे नज़र आता है वह यह है कि अद्भुत इतिहास में रचे-बसे इस विशाल देश के कई शहरों के स्थानीय इतिहास के संरक्षण में हम नाकाम रहते हैं। इसके विपरीत विदेश में हम पाते हैं कि गाइड, म्यूजियम, सुबह या शाम की सैर और अन्य गतिविधियों के माध्यम से हर जगह का बहुत सारा इतिहास वहां आने वालों को उपलब्ध कराया जाता है। स्वतंत्रता के बाद हमने हमारा पूरा ध्यान आर्थिक स्थिरता पाने में लगा दिया और इस प्रक्रिया में हम अपने समृद्ध इतिहास के संरक्षण में चूक गए, जैसे दुनिया के अन्य देशों में होता है। हम छत्रपति शिवाजी जैसे योद्धा के बारे में जानते हैं, क्योंकि हमने इसे स्कूल में इतिहास की किताबों में पढ़ा है। लेकिन, हमें उनकी बहादुरी से लड़ी गईं लड़ाइयां, किए गए महान फैसले और उनकी उदारता की बातें कालक्रम में याद नहीं आती, तब भी नहीं जब हम उनके किले के सामने खड़े हों, जो वहां आने वालों के लिए बहुत अच्छी वाकेथन कहानियां हो सकती हैं। इसीलिए पुणे के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल सारंग मांडके और सारंग भोइरकर (दोनों 32 वर्षीय) अपने जॉब के साथ पुणे के इतिहास के स्टोरीटेलर बनें तो लोगों को अचरज हुआ।

पिछले एक साल से मांडके और भोइरकर हाउसिंग सोसायटी, बुक कैफे जैसी शहरी जगहों और शहर के आसपास स्थित किलों व मंदिरों जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर हेरिटेज वॉक और ट्रेक्स के दौरान वहां की कहानियां सुनाते रहे हैं। पुणे के इतिहास व हेरिटेज के बारे में विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने और उनका नेतृत्व करने वाले शौकिया इतिहासकारों की बढ़ती सूची में ये दोनों भी शामिल हैं। उन्हें इतिहास, इंडोलॉजी, पुरातत्व विज्ञान, वास्तुकला या इतिहास संरक्षण में कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं मिला है। ‘गोष्ट इथे संपत नाही’ यानी कहानी यहां खत्म नहीं होती, नाम से संचालित होने वाले भोइरकर और मांडके के स्टोरीटेलिंग सेशन मुख्यत: मराठा राज्य और पेशवा काल की कहानियों पर केंद्रित होती हैं।

उन्होंने शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज की ज़िंदगी और पेशवा शासन की कहानियों पर ब्लॉग से की। इसमें मोड़ तब आया जब उन्हें एक दोस्त के घर 20-25 श्रोताओं के लिए स्टोरीटेलिंग सेशन के लिए आमंत्रित किया गया। माना गया था कि सेशन दो घंटे में खत्म हो जाएगा पर वह तीन घंटे तक चला और जो फीडबैक मिला, वह आश्वस्त करने वाला था। उन्हें बताया गया कि उनका अंदाज बहुत पेशेवराना था। फिर कई को-ऑपरेटिव सोसायटियों ने इसे दोहराया। एक साल पहले पुणे स्थित एडवेंचर व आउटडोर इवेंट कंपनी ‘ट्रैकिज़्म’ के संस्थापकों ने उन्हें स्टोरीटेलिंग के जरिये अपने टुर की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। महीने में दो बार भोइरकर और मांडके ट्रेकिज्म के ट्रेक्स एंड वॉक्स में कहानियां सुनाते हैं। किले और इतिहास की विरासत सहजने के इस काम में 22 वर्षीय उदयीमान चार्टर्ड अकाउंटेन्ट शांतनु परांजपे और कम्प्यूटर एप्लिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अनुराग वैद्य भी कूद पड़े और उन्होंने मिलकर एक किताब लिखी ‘फिरस्ती महाराष्ट्राची’, जिसमें 30 से भी ज्यादा ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी होगी। उन्होंने इसी नाम से दिसंबर 2018 में हेरिटेज वॉक भी शुरू की। इतने बरसों से केवल प्रमुख शोध संस्थानों ने ही कालक्रम में इतिहास का संरक्षण किया है। लेकिन अब मांडके, भोइरकर, परांजपे और वैद्य जैसे लोग ऐसे ऐतिहासिक उद्‌देश्य के पथ प्रदर्शक बन गए हैं। ऐसी वॉक के दौरान कहानियां सुनाकर ही अगली पीढ़ी में गर्व की भावना पैदा की जा सकती है। यह काम युवा पीढ़ी हम में ज्यादातर लोगों की तुलना में अधिक परिपूर्णता के साथ कर रही है।

फंडा यह है कि अपने शहर से प्यार है, तो इसे खोजें और अपनी विरासत के विशेषज्ञ बन जाएं- आप इतिहास का संरक्षण करने के साथ इतिहास निर्मित कर सकते हैं।

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

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