आप ज्यादा ग्राहक देखना चाहते हैं तो गतिमान रहें, अपनी बिक्री में ज्यादा से ज्यादा सुविधा जोड़ें

इस शनिवार पुणे के हवेली तालुका में एक मांगडेवाडी स्कूल शिक्षक मोहम्मद आजम को धन्यवाद देते हुए मांओं की आखें भर आईं। आजम उनके घर एक दिन में 6 सामुदायिक कक्षाएं लेने पहली बार पहुंचे थे। लेकिन ऐसे बच्चों के लिए शिक्षकों का पहुंचना जो पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते, यह पुरानी बात हो गई।

पर एक अवधारणा के तौर पर ‘डोर डिलिवरी’ (घर पर ही कोई चीज पहुंचाना) बनी रहेगी। डोर डिलिवरी सिर्फ शिक्षा, सब्जियों और किराने के लिए ही न्यू नॉर्मल नहीं है, बल्कि फैशनेबल कपड़ों, जूतों, लाइफस्टाइल उत्पादों और बच्चों के कपड़ों तक के लिए है।

रिटेल चेन्स और कपड़ों के ब्रैंड्स ने अपने कलेक्शन दिखाने के लिए विभिन्न शहरों के हाउसिंग सोसायटी कॉम्प्लेक्स में एक या दो दिन के कैंप लगाना शुरू कर दिया है क्योंकि ज्यादातर संभावित ग्राहक वायरस के कारण स्टोर्स में जाने से डर रहे हैं। सबसे ज्यादा आक्रामक उत्पाद बिक्री बच्चों के सेगमेंट में हो रही है चूंकि कई बच्चों के स्लीपर्स, जूते और कपड़े पिछले छ: महीनों में छोटे हो गए हैं।

ऐसा नहीं है कि डोर डिलिवरी मॉडल से उन्हें बहुत कमाई हो रही है लेकिन यह ग्राहकों के इंतजार में खाली स्टोर में बैठे रहने से तो बेहतर और फायदेमंद है। कई कंपनियां रहवासियों को अपने उत्पाद दिखाने के लिए अस्थायी टेंट लगा रही हैं, सोसायटी के हॉल किराये पर ले रही हैं। कॉस्मेटिक और लेदर उत्पाद तक सीधे कॉम्प्लेक्स में जा रहे हैं।

इस तरह ये संस्थान पांच महीने के अंतराल के बाद अपने दरवाजे पर खरीदारी करने का मौका दे रहे हैं। न केवल कम्प्यूटर ब्रांड लेनोवो यही तरीका अपना रहा है, बल्कि लैपटॉप सुधारने वाले भी हाउसिंग सोसायटीज में पैम्फलेट बांट रहे हैं और कॉम्पलेक्स में ही लैपटॉप आदि सुधार रहे हैं।

लेकिन महामारी की कहानियों से दूर एक छोटी क्रांति हो रही है, जिसपर सभी की नजर नहीं पड़ी है। जी हां। उद्योगपति रतन टाटा के सहयोग वाली ईंधन डिलिवरी कंपनी रेपोस एनर्जी ने विभिन्न संस्थानों को ईंधन डिलिवर करने के लिए एक महीने में 150 स्टार्टअप रजिस्टर किए हैं। इन स्टार्टअप में पुणे का ईज़ी डीज़ल, मुंबई का नुवेरा एनर्जी, बेंगलुरु का ऑरो फ्यूल्स, कोलकाता का एएमए फ्यूल्स और मिर्जापुर का फ्यूचर फ्यूल सर्विसेस आदि शामिल हैं। भारत को मांग पूरी करने के लिए देशभर में करीब एक लाख फ्यूल स्टेशंस की जरूरत है।

महामारी के इस दौर में आवागमन के लिए दो और चार पहिया वाहनों की बिक्री बढ़ रही है, जिससे ईंधन की मांग भी बढ़ेगी। लेकिन हमारे पास करीब 55 हजार फ्यूल स्टेशन ही हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं। आईओटी के जरिए ये मोबाइल पम्प सुरक्षा के साथ आसानी से एक मोबाइल एप के माध्यम से ग्राहक तक ईंधन पहुंचा सकते हैं। इसे क्लाउड टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया है, जिससे लगातार अपडेट मिलते हैं।

जीपीएस और जियो-फेंसिंग की मदद से इन मोबाइल पेट्रोल पंप की पूरी पारदर्शिता के साथ लगातार निगरानी की जा सकती है। लॉकडाउन के दौरान कंपनी ने कोविड से पहले के दिनों की तुलना में 40% ज्यादा बिक्री की। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना औसतन 5 लाख लीटर ईंधन बिक रहा है। याद रखें, कुछ समय बाद लाइफस्टाइल आइटम अपने स्टोर्स में वापस चले जाएंगे। लेकिन अगर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की सप्लाई बनाए रखें, तो आवश्यक सामग्रियों के साथ शायद ऐसा न हो क्योंकि ग्राहक ने ‘सुविधा’ का स्वाद चख लिया है और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में नए रुटीन जोड़ लिए हैं।

फंडा यह है कि अगर आप ज्यादा ग्राहक देखना चाहते हैं तो गतिमान (मोबाइल) रहें, अपने बिक्री में ज्यादा से ज्यादा सुविधा जोड़ें।
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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