आप मानें या न मानें, टेक्नोलॉजी इस दुनिया को नए स्तर पर ले जाएगी, खासतौर पर कोरोना के बाद

अगर आप काम पर जाने के लिए रेलयात्रा करते हैं तो ख्वाब देखते होंगे कि कितना सुविधाजनक होता, अगर आपको ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आने से काफी पहले ही यह पता चल जाता कि ट्रेन में कितनी सीट खाली हैं या कम से कम यह तो पता चल ही जाता कि क्या ट्रेन में सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए पर्याप्त जगह है।

अब आपका सपना सच हो रहा है। यूके में ‘साऊथईस्टर्न’ नाम की प्राइवेट रेल कंपनी पहली ट्रेन कंपनी बन गई है जो यात्रियों को यात्रा से पहले खाली सीट्‌स और सोशल डिस्टेंसिंग के लिए जगह के बारे में कलर कोडेड (रंग आधारित) जानकारी देगी। अगले हफ्ते शनिवार से शुरू हो रही सेवा में हरे से लेकर लाल तक कलर कोडेड स्केल हैं, जिसमें गहरा हरा रंग वे डिब्बे दिखाता है, जिनमें खाली सीट हैं और दो मीटर की दूरी संभव है। यह नया हल पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करने में लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाएगा।

याद कीजिए, नई सिम पाने में मदद न करने पर आप कितनी बार सिम कार्ड देने वाले किओस्क ऑपरेटर या दुकानदार पर भड़के होंगे? चिंता न करें, फिजिकल सिम अब जल्द गुजरे जमाने की बात होने वाली हैं। अब अपने नए अवतार में वे ई-सिम हो जाएंगी। जी हां, डिजिटल सिम की मदद से यात्रा कर रहे लोग स्थानीय नेटवर्क ऑपरेटर की सेवाएं डाउनलोड कर पाएंगे, वह भी नए देश में पहुंचने से पहले। इससे रोमिंग चार्जेस और फिजिकल सिम कार्ड बेचने वाला किओस्क ढूंढने की परेशानी से बच सकेंगे। एक फोन में 15 ई-सिम रखी जा सकेंगी। यूके में वोडाफोन, ईई और ओटू डिजिटल सिम देते हैं।

और इसलिए भविष्य में आपके स्मार्टफोन पूरी तरह वॉटरप्रूफ हो सकते हैं क्योंकि फिजिकल सिम कार्ड्स गायब हो जाएंगे। फोन को वॉटरप्रूफ बनाने में सबसे बड़ी बाधा उन छेदों को बचाना ही है, जिन्हें टेक्नोलॉजी वाले ‘सिम कार्ड ट्रे’ कहते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि बड़े फोन निर्माता पहले ही ऐसे फोन बनाने पर काम कर रहे हैं जो सिर्फ डिजिटल सिम कार्ड पर चलेंगे, जिन्हें डाउनलोड कर सकते हैं। सिम कार्ड ट्रे की तुलना में स्पीकर्स के होल वाटरप्रूफ बनाना आसान है।

अगर आप सोचते हैं कि टेक्नोलॉजी केवल विकसित देशों में ही तेजी से बदलती और अपनाई जाती है और हमारे जैसे विकासशील देशों में नहीं, तो मैं आपको ‘गंगाव्वा’ की कहानी बताता हूं, जो हाल ही सीएनएन की नई सीरीज ‘टेक फॉर गुड’ में नजर आईं। यह सीरीज जीवन बदलने वाली ऐसी तकनीकें बता रही है, जो लोगों की निजी बाधाओं को पारकर, अपने शौक को नई ऊंचाई देने में मदद कर रही है।

भारतीय यूट्यूब ‘मेगा-स्टार’, 58 वर्षीय मिलकुरी गंगाव्वा उन पांच कलाकारों में शामिल थीं, जिन्होंने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए टेक्नोलॉजी की शक्ति का इस्तेमाल किया। गंगाव्वा का जीवन यूट्यूब चैनल ‘माय विलेज शो’ में नजर आने के बाद बदल गया, जिसके 1.6 करोड़ सब्सक्राइबर और 36 करोड़ से ज्यादा व्यूज हैं। तीन साल पहले तक, गंगाव्वा हैदराबाद से 200 किमी दूर लांबाडिपल्ली गांव में किसान थीं। वे फसल के लिए जमीन तैयार करना, बुआई और बतौर मजदूर अपने दोस्तों और पड़ोसियों के खेतों में भी काम करती थीं। फिर वे यूट्यूब पर नजर आईं और अब गंगाव्वा सेलिब्रिटी हैं।

फंडा यह है कि आप मानें या न मानें, टेक्नोलॉजी इस दुनिया को नए स्तर पर ले जाएगी, खासतौर पर कोरोना के बाद। गंगाव्वा की तरह हम सभी को भी इसे जल्द से जल्द अपनाना होगा, क्योंकि आखिरकार यह सभी की जीवनशैली बदल देगी।
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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