आप लोगों की ‘यूनिवर्सिटी’ में हमेशा पढ़ सकते हैं!

हमारे घरेलू कर्मचारी अक्सर थोड़े समय के लिए अलग-अलग कारणों से कुछ पैसा एडवांस में मांगते रहते हैं, लेकिन इन दिनों उनकी एक मांग के साथ बिलकुल नई वजह सामने आई है! मुझे आपके घर के बारे में तो नहीं पता, लेकिन मेरे घर में इस हफ्ते ऐसा हुआ है! इस हफ्ते मेरे यहां काम करने वाली एक कर्मचारी परेशान थी और उसने 2000 रुपए की तुरंत सहायता मांगी। जब हमने वजह जाननी चाही, तो उसने बताया कि प्राइवेट टैक्सी चलाने वाले उसके पति से एक ‘मामूली ड्राइविंग गलती’ हो गई है और उस पर लगे जुर्माने की वजह से उसके घर का मासिक बजट बिगड़ गया है, जो उसके पति की गाड़ी के ईंधन के खर्च के बराबर है! यह भी पता चला कि उसके पति को स्पीड लिमिट तोड़ने के कारण 2000 रुपए का जुर्माना लगा है। जी हां, मैं उसी मोटर वाहन अधिनियम की बात कर रहा हूं जो संसद से पास होकर कानून बनने के बाद 1 सितम्बर 2019 से प्रभावी हो गया है।
ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़े लोग भले ही कोई भी वाहन चलाते हों या चलवाते हों- चाहे वो ऑटो रिक्शा, टैक्सी, टेम्पो या फिर ओला-उबर से अटैच प्राइवेट टैक्सी क्यों न हो- उन्हें चेन्नई के व्यासरपाडी कस्बे के धंडपाणी नाम के व्यक्ति को जरूर जानना चाहिए। मूल रूप से धर्मपुरी जिले का रहने वाले धंडपाणी किशोर उम्र में जेब में सिर्फ 7 रुपए लेकर चेन्नई चले आए थे। अपने गांव से 1140 किमी दूर सपनों के शहर चेन्नई तक पहुंचने के लिए उन्होंने दूध वाहन जैसे कई वाहनों में यात्रा की। जब वे चेन्नई पहुंच गए तो उन्होंने सबसे पहला सबक यह सीखा कि एक स्कूल ड्रॉपआउट बच्चे के लिए कहीं भी पैर जमाना बड़ा मुश्किल होता है, जैसा कि उनके साथ हो रहा था। इसके बाद करीब एक दशक तक हर तरह का संघर्ष करते हुए उन्होंने कई सबक और कुछ पैसा जोड़ते हुए ऑटो ड्राइविंग का स्वतंत्र काम शुरू किया। इस दौरान उनकी शादी हो गई और वे तीन बच्चों के पिता भी बन गए। लेकिन, वे अपना पहला सबक नहीं भूले कि शिक्षाा बेहद जरूरी है। उन्होंने अपने काम के घंटे बढ़ा लिए और अब वे सुबह 7 बजे निकलकर रात 10 बजे और कई बार तो उसके भी बाद लौटते थे, लेकिन इस सबके बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के साथ कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने जो दूसरा सबक सीखा वह अपने साथी ऑटोरिक्शा ड्राइवरों को देखकर सीखा जो अपने वाहन के ऊपरी हिस्से में फिल्मी सितारों और नेताओं की तस्वीरें लगाए घूमते थे। जब आप ऐसे एक्शन हीरो और नेताओं से घिरे, हमेशा एक भागमभाग वाले शहर में हो, तो वाहन की स्पीड लिमिट और सिग्नल तोड़ना जोश दिखाने जैसा काम होता है, और इसके लिए आपका तन और मन दोनों तैयार रहते हैं।
इसी को ध्यान में रखकर 58-वर्षीय धंडपाणी ने अपनी ड्राइविंग सीट के आगे अपने परिवार की फोटो लगाई और वे सबसे पहले उन्हीं को देखकर अपना नया दिन शुरू करते हैं। अनजाने में ही सही ये फोटोज उन्हें अपनी स्पीड को नियंत्रित रखने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है, “मैंने कभी अंधाधुंध ऑटो नहीं चलाया, क्योंकि वे फोटो मुझे अपने परिवार के प्रति कर्तव्य की याद दिलाते हैं और अनचाहे जोखिम लेने से बचाते हैं।’
उधर, जैसे-जैसे उनके बच्चे पढ़ाई में अच्छा करते रहे और उनकी पत्नी ने घर का मोर्चा संभाला, वे स्वयं पांच पेट भरने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते रहे। लेकिन, जब भी वे सड़क पर वाहनों की चपेट में आकर मरे जानवरों के शव देखते थे, उनका मन दुखी हो जाता था। इसीलिए, जब उनके बेटे दिनेश ने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली तो, धंडपाणी ने स्वयं पहल करके उसका एडमिशन वेटरनेरी साइंस में आगे पढ़ाई के लिए करा दिया। दिलचस्प बात यह थी कि दिनेश को इसका पता तब चला जब काउंसलिंग की तारीखों की घोषणा हो गई कि उसके पिता ने ऐसा कदम उठाया है।
आज धंडपाणी तीन सक्षम ग्रेजुएट बच्चों के गौरवान्वित पिता हैं। इनमें एक वेटरनेरी डॉक्टर, एक सिविल इंजीनियर और एक लेक्चरर है। उनकी खुशियों की कोई सीमा नहीं होती जब वे अपने बच्चों को अंग्रेजी बोलते सुनते हैं। वहीं, उनके बच्चे अपने पिता को रोल मॉडल के रूप में देखते हैं- एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने जीवन में कभी एक पैसे का जुर्माना नहीं भरा, जबकि वे ऐसे प्रोफेशन में हैं जहां ऐसा होना आम बात है।

फंडा यह है कि कोई बात नहीं अगर आपको अक्षर ज्ञान नहीं है, ज़िंदगी आपको ऐसे कई मौके देती है जब आप स्वयं को लोगों के बीच रहकर उन्हीं की ‘संगत वाली यूनिवर्सिटी’ में खुद को शिक्षित कर सकते हैं। हां, लेकिन ऐसा करने की शपथ लेना आपके ऊपर है।

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