कभी-कभी खुद को सांता क्लॉज की टीम का सदस्य मानें और जान-पहचान वालों या अनजान लोगों की विशलिस्ट पता करें

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

जब मेरी बेटी छोटी थी तो ऐसा कोई साल नहीं गुजरता था, जब मैं उसके बिस्तर के पास लटके लाल मोज़े में कोई सरप्राइज गिफ्ट न रखूं। मैं उसके उन नियमित सवालों का जवाब नहीं दे पाता था जो इसके इर्द-गिर्द होते थे कि ‘क्या सांता असली है?’ मैं उसे ऐसी जगह ले जाता था जहां कोई सांता क्लॉज के भेष में बच्चों को चॉकलेट बांट रहा हो। जब 1999 के बाद मॉल कल्चर मशहूर हुआ, उसने बच्चों में मशहूर खेल ‘सीक्रेट सांता’ खेलना शुरू किया।

इस खेल में समूह का एक सदस्य सभी की इच्छा-सूचियां (विशलिस्ट) मिला देता है और उन्हें बांट देता था, जिसमें एक व्यक्ति का नाम और पता होता था। जिस सदस्य को विशलिस्ट मिलती है, उसे उपहार खरीदकर और भेजकर उसकी इच्छा पूरी करनी होती है, जिसका नाम विशलिस्ट में है। ऐसे उपहारों का खर्च पहले से तय होता है, ताकि किसी पर वित्तीय बोझ न पड़े और फिर भी लोगों को उनके उपहार मिल जाएं। इसमें सरप्राइज यह है कि आपको पता नहीं चलता कि उपहार किसने दिया।

इस खेल से बच्चे दूसरे बच्चों, खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोरों और आवारा जानवरों के प्रति दयाभाव रखना सीखते हैं। जब वे हमारी तरह वयस्क होते हैं, इस बात पर विश्वास करने लगते हैं कि सांता और क्रिसमस की परियां कोई अदृश्य लोग नहीं हैं, बल्कि आप उन्हें इसी धरती पर पा सकते हैं और सरप्राइज गेम खेलने के लिए हम हमेशा उनकी टीम में हैं। कुछ उपहारों से खेलते हैं, कुछ ‘श्रम’ से और कुछ अलिखित विशलिस्ट को पढ़ने का हुनर हासिल कर लेते हैं।

बौद्ध भिक्षु लोपेन सांगे कालडेन लामा का उदाहरण देखें, जो पश्चिम बंगाल के जयगांव के पास 70 हजार की आबादी वाले रामगांव गांव में महाबोधि धर्म केंद्र चलाते हैं। उनमें बचपन से पढ़ने की ललक थी। इसलिए उन्होंने गांव में 2016-17 में बौद्ध केंद्र स्थापित किया। वे ऐसी लाइब्रेरी बनाना चाहते थे, जो बिना किसी धार्मिक झुकाव के अच्छे विचारों और सकारात्मक सोच पर केंद्रित हो। आज, उनकी लाइब्रेरी की सैकड़ों किताबें कई बच्चों को हिन्दी, अंग्रेजी, बंगाली और यहां तक कि नेपाली और तिब्बती आदि पसंद की भाषाओं में लिखने और पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। रोजाना दोपहर 3 बजे यह लाइब्रेरी हंसी से गूंज उठती है, जब 3 से 14 वर्ष तक के बच्चे आकर किताबों से भरी अलमारियों के पास आते हैं।

तमिलनाडु के आर्टिस्ट-फोटोग्राफर इसाइ प्रकाश का उदाहरण भी देखें। लॉकडाउन के महीनों में उन्होंने अपनी मां मालिनी को उदास देखा। अपने तीन बेटों को पालना, जिसमें प्रकाश सबसे बड़े हैं और चेन्नई में पांच लड़कियों की टीम के साथ स्वसहायता इकाई के जरिए एक निजी कंपनी के लिए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बनाना ही मालिनी की दुनिया थी। लॉकडाउन में उनकी इकाई बंद हो गई और पैसों की कमी से उन्हें अवसाद हो गया। वे भावनात्मक रूप से टूट गईं और लगने लगा कि सबकुछ खत्म हो गया।

मनोविज्ञान से पोस्टग्रैजुएट प्रकाश ने अपनी मां में बदलाव देखे और अपने एक दोस्त से कार लेकर उन्हें एक महीने लंबे पेशेवर टूर पर ले गए। टूर क्रिसमस के दिन खत्म होगा और यह टूर ही क्रिसमस गिफ्ट था क्योंकि इसने मालिनी के सामने नई दुनिया खोल दी और उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया।

इस पर बहस हो सकती है कि सांता असली है या नहीं, लेकिन जब आप वंचितों, आर्थिक रूप से कमजोरों और यहां तक कि अवसाद ग्रस्त लोगों के लिए कुछ करते हैं तो उनके लिए सांता वास्तव में होता है और हम सभी उसकी टीम में हैं।

फंडा यह है कि कभी-कभी खुद को सांता क्लॉज की टीम का सदस्य मानें और जान-पहचान वालों या अनजान लोगों की विशलिस्ट पता करें। यकीन मानिए, जब आप उन्हें पूरा करेंगे, क्रिसमस की खुशी दोगुनी हो जाएगी।

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