किसी भारतीय बिजनेस में मुनाफा कमाना है तो 130 करोड़ की आबादी तक पहुंचने के लिए सभी भारतीय भाषाओं को इंटरनेट पर अपने साथ जोड़ना होगा

“ग्लोबल कदम बढ़ाइए, पर मुनाफे के लिए “लोकल से जुड़िए

इन तीन बातों का आपस में संबंध न दशकों पहले की बात है पर मुझे अच्छी तरह से याद है कि वर्धा (महाराष्ट्र) स्थित सेवाग्राम में हमारे पड़ोसी की मृत्यु सिर्फ इसलिए हो गई थी क्योंकि उनके रिश्तेदार और डॉक्टर दोनों को ही समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें बीमारी क्या है? उनका उपचार चल रहा था, पर जब तक डॉक्टर जरूरी मेडिकल जानकारियां जुटा पातें, उन्होंने प्राण त्याग दिए। संक्षेप में कहूंगा कि उस दौर टेलीफोन और विश्वसनीय ट्रांसपोर्ट सुविधा न होने के कारण वे चल बसे। इस घटना ने मेरे पिता को गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद अपना नागपुर ट्रांसफर ले लिया जहां हमारे फैमिली फिजिशियन डॉ हरिदास रहते थे। वह बीमारी पकड़ने में बहुत अच्छे थे और मरीज को सही स्पेशलिस्ट के पास भेज देते थे। अपने इसी तरीके की वजह से उन्होंने कई मरीजों की जान बचाई थी।

आज मेरी बेटी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रही कि हम लोग कभी ऐसे दौर में रहे थे, क्योंकि अब नई पीढ़ी अपने बेडरूम में बैठे बैठे ही पसंद के डॉक्टर से सलाह ले सकती है। इसके लिए तकनीकी उन्नति को धन्यवाद दिया जाना चाहिए। लेकिन, फिर भी एक बात जो मुझे परेशान कर रही है वह यह है कि स्मार्टफोन होने और उसे चलाना आने के बाद भी, किसी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में मेरे यहां काम करने वाली घरेलू कर्मचारी और ड्रायवर वो सब नहीं कर सकते जो मेरी बेटी कर सकती है। मैं यकीन से कह सकता हूं कि इस समस्या का कारण पढ़ाई-लिखाई नहीं, बल्कि भाषा बाधा है। मेडिकल प्लेटफॉर्म और मेडिकल टेलीकॉम कंसल्टेंसी में स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां अंग्रेजी में होती है और सिर्फ स्थानीय भाषा जानने वाले लोगों के लिए ये बड़ी परेशानी होती है। धीरे धीरे इसी से एक आइडिया निकला और स्थानीय भाषाओं को तरजीह मिलने से जन्मी ‘myUpchar‘ नाम की स्टार्टअप कम्पनी, जो अभी हिंदी भाषा में मेडिकल सेवाएं दे रही है। इसका लक्ष्य टियर- टू और टियर-थ्री शहरों में रहने वाले करीब 50 करोड़ लोगों को मेडिकल सेवाएं देना हैं। अपनी शुरुआत के 19 महीनों में, कम्पनी क्षेत्रीय उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को मैप कर रही है और सुविधाएं को बदलने के साथ, नई जोड़ भी रही हैं और हटा भी रही है। इसकी वेबसाइट पर कई तरह की बीमारियों के बारे में बताया गया है और मरीजों को साइट पर ही अपनी समस्या पोस्ट करके सीधे डॉक्टर से सलाह लेने की सुविधा भी मिल रही है। चूंकि ऑनलाइन हेल्थ केयर इंडस्ट्री ज्यादातर मेट्रो शहरों पर ध्यान देते हैं, और इस वजह से स्थानीय भाषा बोलने वाली आबादी को कुछ खास मदद नहीं मिल पाती। इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इंटरनेट बूम से देश में भारतीय भाषाओं के इंटरनेट यूजर्स की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। आंकड़े कहते हैं कि करीब 93 फीसदी लोगों के लिए इंटरनेट पर अपनी भाषा इस्तेमाल करना पहली पसंद है। यही वजह है कि “myUpchar” कमाऊ मॉडल बनने से पहले देश की 13 क्षेत्रीय भाषाओं में सेवाएं देना चाहती है। अभी यह कम्पनी सिर्फ विज्ञापनों से पैसा कमा रही है लेकिन उनकी योजना डॉक्टर के कंसल्टेशन से भी मुनाफा कमाने की है लेकिन वे ऐसा तब करेंगे जब एक बड़ी आबादी ऐसे इंटरनेट प्लेटफॉर्म से परिचित होकर उनके साथ जुड़ जाए। इस कम्पनी के फाउंडर रजत गर्ग को भरोसा है कि, जब एक बार लोग अपने बेडरूम में बैठकर, अपनी भाषा में डॉक्टरी सलाह लेने के आदी हो जाएंगे तो कंसल्टेशन फीस भी देने के लिए राजी होंगे। हैरानी की बात नहीं कि वे मुनाफा कमाने के लिए अभी धैर्य रखे हुए हैं और पहले ऐसे लोगों आगे ला रहे हैं जो अपनी भारतीय भाषा में संवाद करना और समझना चाहते हैं। इसकी वजह यह भी है कि उन्होंने अगस्त 2018 तक कई एंजेल इंवेस्टर्स से 25 मिलियन डॉलर प्राप्त किए हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इंवेस्टर्स भी मानते हैं कि पूरे भारत को केवल वे ही कंपनियां कवर कर सकती हैं जो सिर्फ अंग्रेजी में नहीं बल्कि अलग-अलग भारतीय भाषाओं में सेवाएं देती हैं। इसलिए यह साबित होता है कि पैसा कमाने के लिए, आधुनिक सुविधाएं पेश करना बेहद जरूरी है, लेकिन इन्हें कई मातृ भाषाओं में लाना होगा ताकि इस्तेमाल करने वाले आसानी से समझ सकें।

फंडा यह है कि  अंग्रेजी भाषा में इंटरनेट का इस्तेमाल करना आसान है, पर किसी भारतीय बिजनेस में मुनाफा कमाना है तो इंटरनेट आधारित कम्पनी को एक अरब 30 करोड़ की आबादी तक पहुंचने और उसे लुभाने के लिए सभी भारतीय भाषाओं को अपने साथ जोड़ना होगा।

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

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