जब आप दूसरों की दौलत पर नजर नहीं डालते, तब एक प्राकृतिक न्याय होता है, जो आपको वह सबकुछ देता है, जिसे पाने का आपने सपना देखा था।

नवंबर की एक सुबह, हमारी मराठी विंग ‘दिव्य मराठी’ के सहकर्मी जय प्रकाश पवार, अभिजीत कुलकर्णी और पीयूष नाशीकर, अपने दोस्त अमित कुलकर्णी के साथ किसी काम से नासिक से मुबंई जा रहे थे। रास्ते में वे नाश्ते के लिए होटल डायमंड फूडवे पर रुके। बिल चुकाने के दौरान सभी पैसे देने आगे आए। अंत में उनमें से एक ने पैसे दिए। अमित ने तय किया कि वे नाश्ता खत्म कर बटुआ जेब में रखेंगे और उसे बगल वाली कुर्सी पर रख दिया। वह वहीं छूट गया। बटुए में क्रेडिट कार्ड और आधार, पैन कार्ड जैसे निजी दस्तावेज थे। उन्होंने अपने दोस्त के घर खाना गया और बटुआ खोने का अहसास उन्हें नासिक लौटने के दौरान हुआ, जब उन्होंने टोल गेट पर पैसे देना चाहे। तुरंत गाड़ी में और उन जगहों पर खोज शुरू हुई, जहां वे सुबह से गए थे। इधर अमित क्रेडिट कार्ड ब्लॉक करवाने की तैयारी कर रहे थे और सोच रहे थे कि डुप्लीकेट सरकारी दस्तावेज कैसे मिलेंगे। चूंकि नाश्ते को 12 घंटे बीत चुके थे, इसलिए उन्हें भरोसा था कि बटुआ होटल में नहीं मिलेगा। हालांकि, उन्होंने वहां पूछा और उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि बटुआ सुरक्षित था और कोई सामान गायब नहीं हुआ था। होटल मैनेजर ने अमित से आधार कार्ड पर लिखे नंबर पर संपर्क की कोशिश की थी, लेकिन अमित नंबर बदल चुके थे। उन्होंने पूरे होटल स्टाफ की सराहना की और धन्यवाद दिया। इससे मुझे अमेरिका के कैंसस सिटी के एक बेघर भिखारी बिली रे हैरिस की हृदयस्पर्शी कहानी याद आई। वह हर रोज राहगीरों से भीख मांगता था। हैरिस जहां भीख मांगता था, उसके पास ही ऑफिस में काम करने वाली कर्मचारी सारा डार्लिंग ने फरवरी 2013 में हैरिस के कप में कुछ सिक्के डाले।

हैरिस ने उसकी दयालुता की सराहना की, जिसके बाद बातचीत में सारा ने अपना नाम बताया। लेकिन दोनों ने ध्यान नहीं दिया कि सारा ने धोखे से कप में सगाई की अंगूठी गिरा दी थी। बाद में जब हैरिस ने कप में अंगूठी देखी तो वह समझ गया कि यह सारा की है। उस पल उसके मन में ईमानदारी और गरीबी के बीच जद्दोजहद चल रही थी।

ईमानदारी पर उसकी गरीबी भारी पड़ गई और वह अंगूठी बेचने ज्वेलरी की दुकान पर गया। ज्वेलर ने उसे 2000 डॉलर का ऑफर दिया लेकिन हैरिस ने अनिच्छा दिखाई। उसकी ईमानदारी पैसे लेने से रोक रही थी। दुकानदार ने सोचा कि भिखारी लालची है और इसलिए कीमत बढ़ाता रहा। अंतत: हैरिस को पता चला कि अंगूठी 4000 डॉलर की है। तब उसे सिक्के देती हुई सारा का खुश चेहरा याद आया। उसने अंगूठी बेचने से मना किया और सारा को खोजने का फैसला लिया। कई दिन खोजने के बाद अंतत: सारा मिल गई। स्वाभाविक है कि उसे अंगूठी देख अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। फिर उसने हैरिस की मदद के लिए पैसे जुटाने, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह कहानी पोस्ट की। लक्ष्य 1000 डॉलर था।

लेकिन तीन महीने में ही सारा और उसके पति ने 1,90,000 डॉलर इकट्‌ठे कर लिए और हैरिस ने एक घर खरीदा, कार खरीदी और अच्छी जिंदगी जीने लगा। जब अमेरिकी मीडिया यह कहानी सामने आई, तो हैरिस के वे रिश्तेदार भी साथ आ गए, जिनका उससे 16 वर्ष पहले संपर्क टूट गया था।

फंडा यह है कि जब आप दूसरों की दौलत पर नजर नहीं डालते, तब एक प्राकृतिक न्याय होता है, जो आपको वह सबकुछ देता है, जिसे पाने का आपने सपना देखा था।

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