जब प्रेम और परवाह, दौलत, उम्र और परिस्थिति नहीं देखते हैं, तो अंतत: वे न सिर्फ इंसानों का बल्कि पुलिसवालों और कोर्ट का दिल भी जीत लेते हैं

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वे सहानुभूति और प्रेम नहीं दिखा सकते। क्योंकि लोन रिकवरी एजेंट के लिए यह ठीक नहीं है। लेकिन 43 वर्षीय एरिक राजू जॉनसन ने इससे विपरीत किया। उन्होंने कई ग्राहकों की दयनीय माली हालत देखी, तो मानवीय आधार पर महामारी के दौरान कर्ज वसूली के सख्त तरीके नहीं अपनाए। एरिक पुणे में मई 2018 से एक फाइनेंस कंपनी में बतौर सीनियर रिकवरी टीम एक्जीक्यूटिव काम कर रहे थे।

लॉकडाउन से पहले तक पिछले रिकॉर्ड के आधार पर उनका प्रदर्शन लगातार अच्छा था। लेकिन लॉकडाउन के दौरान कंपनी को उनका प्रदर्शन कुछ और दिखा। एचआर विभाग ने 3 दिसंबर को उनके ‘जानबूझकर’ खराब प्रदर्शन को कारण बताते हुए फोन के जरिए उनसे इस्तीफा देने और पहचान पत्र जमा करने को कहा।

इसे स्वास्थ्य संकट के बीच गैर-कानूनी बर्खास्तगी बताते हुए एरिक मामले को 4 दिसंबर को पुणे लेबर कोर्ट ले गए और गलत कारणों से बर्खास्त करने को लेकर राहत मांगी। याचिका में उन्होंने केंद्र सरकार के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शनों के उल्लंघन का जिक्र भी किया जिनके मुताबिक मुश्किल वक्त में नियोजकों को कर्मचारियों के प्रति नर्म रवैया अपनाने कहा गया था। इस शुक्रवार, लेबर कोर्ट की जज धनश्री मोरे ने गैर-बैकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा एरिक के खिलाफ कोई भी कदम उठाने पर अस्थायी रोक लगा दी।

इस रविवार मॉर्निंग वॉक के दौरान जब मैं मोबाइल पर मेरे दोस्त द्वारा साझा की गई यह जानकारी पढ़ रहा था, मैंने एक अन्य दृश्य देखा।

वह शायद दो या तीन वर्ष का होगा। वह अपने माता-पिता के बीच में चल रहा था, जो एक-दूसरे से तीन मीटर की दूरी पर सब्जियां बेच रहे थे। वह खाली हाथ नहीं जा रहा था। उसने अपने पिता की टोकरी से एक बैंगन लिया और जाकर मां को दे दिया। उसकी मां ने उसे एक रुपया दिया। पैसे लेकर उसने मां को गले लगाया और फिर पिता के पास सब्जी लेने गया। पिता उसे रोककर बोला, ‘तुम्हें पिछली सब्जी के पैसे देने होंगे, फिर मैं और सब्जी दूंगा।’ बच्चे ने यहां-वहां देखा और उसे समझ नहीं आया कि क्या करे। फिर अचानक उसने पिता को गले लगा लिया और एक चुंबन दिया।

अब पिता ने उसे सब्जी उठाने से नहीं रोका और वह दौड़कर मां के पास और पैसे कमाने चला गया। इस ‘जादू की झप्पी’ के दृश्य ने कई राहगीरों को आकर्षित किया, जो दंपति से सब्जी खरीदते हुए बच्चे की हरकतों का मजा ले रहे थे। यह दंपति मॉर्निंग वॉक के समय नासिक के इंदिरा नगर में सड़क किनारे सब्जियां बेच रहा था।

इससे मुझे कैंसस, अमेरिका के सात वर्षीय लड़के ऑलिवर डेविस की याद आई, जो पुलिस ऑफीसर के कपड़े पहनकर, खिलौने वाली पुलिस बाइक पर बैठकर सीधे वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के कमरों में घुस जाता है। वह उन्हें कार्ड देता है जो ‘ट्रैफिक चालान’ जैसा दिखता है, लेकिन उसपर संदेश होता है कि ‘आपको बहुत प्यारा होने के कारण चालान दिया गया है।’ वह उन्हें गुलाब देकर गले लगा लेता है। कई बुजुर्ग इसपर रोते हुए बताते हैं कि उन्हें 10 साल से किसी ने गले नहीं लगाया।

ऑलिवर अब तक 15 हजार से ज्यादा फूल और झप्पियां दे चुका है। उसके मुताबिक ‘असली पुलिसवाला लोगों की मदद करता है’। कैंसस पुलिस ने अमेरिकियों के प्रति अच्छे व्यवहार के लिए ऑलिवर को मानद पुलिस बैच दिया है।

फंडा यह है कि जब प्रेम और परवाह, दौलत, उम्र और परिस्थिति नहीं देखते हैं, तो अंतत: वे न सिर्फ इंसानों का बल्कि पुलिसवालों और कोर्ट का दिल भी जीत लेते हैं।- एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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