जिसका मन दूसरों की खुशी के बारे में सोचे वही संत

एक सफल बिज़नेसमैन मुनुस्वामी ने विशाखापटनम के बाहरी इलाके में तीन मंजिला फार्महाउस खरीदा, जिसमें स्विमिंग पूल और बाग है। बाग के पिछले हिस्से में सौ साल पुराना आम का पेड़ है। उन्होंने यह फार्महाउस खरीदा ही इसलिए कि उनकी पत्नी को पेड़ों से अच्छादित घने बाग व आम बहुत पसंद हैं। उनके मित्र ने सलाह दी कि फार्महाउस के नवीनीकरण के पहले वे किसी वास्तु पंडित से सलाह लें। आश्चर्य की बात यह रही कि वास्तु में कभी विश्वास न रखने वाले स्वामी ने इस सलाह को गंभीरता से लिया और हैदराबाद के प्रख्यात वास्तुविद डॉ. वीरा रेड्डी की सेवाएं लीं। रेड्डी इस पेशे में तीन दशकों से अधिक समय से हैं। स्वामी डॉ. रेड्डी को अपनी कार में खुद ड्राइव करके अपने फार्म ले जा रहे थे। रास्ते में जब भी पीछे की कारें उन्हें ओवरटेक करने की कोशिश करतीं तो वे अपनी कार किनारे करके उन्हें राह दे देते। डॉ. रेड्डी ने कहा- ‘आपकी ड्राइविंग तो वाकई बहुत सुरक्षित है।’ स्वामी बोले- ‘आमतौर पर जो ओवरटेक करना चाहते हैं उन्हें जल्दी वाला जरूरी काम होता है, हमें उन्हें जाने देना चाहिए।’
जब वे उस जगह के नज़दीक पहुंचे तो सड़कें संकरी हो गईं और अचानक एक बच्चा गली से खिलखिलाता हुआ आया और सड़क के दूसरी तरफ दौड़ने लगा। स्वामी ने कार रोक ली और बगल वाली गली की ओर देखने लगे, जैसे वे किसी का इंतजार कर रहे हों। अचानक एक और बच्चा बाहर आया, जो पहले गए बच्चे का पीछा कर रहा था। पंडित चकराए और पूछा- ‘आपने कैसे जाना कि एक और बच्चा पीछे आ रहा होगा?’ स्वामी मुस्कुराए, ‘बच्चे हमेशा एक-दूसरे का पीछा करते हैं, क्योंकि किसी साथी के बिना किसी बच्चे ऐसे खिलखिलाना संभव नहीं।’ पंडित बोले- ‘आप वाकई दूसरों का बहुत ख्याल रखते हैं!’ फार्महाउस पहुंचने पर वे पैदल पिछले हिस्से में जा रहे थे तो अचानक पक्षियों का एक झुंड पेड़ों में से निकलकर उड़ा। यह देखकर स्वामी ने पंडित से कहा- ‘आपको हर्ज न हो तो हम थोड़ी देर यहां इंतजार करें।’ पंडित ने पूछा- ‘क्या बात है?’ स्वामी ने बड़े मजाकिया लहजे में जवाब दिया- ‘शायद पिछले हिस्से में कुछ बच्चे आम चुरा रहे हैं। हम अभी चले गए तो हो सकता है वे घबरा जाएं। हम यहीं ठहर जाते हैं ताकि घबराहट में किसी के पेड़ से नीचे गिरने का जोखिम न पैदा हो जाए।’
पंडित वीरा रेड्डी ने बड़ी-सी मुस्कान के साथ कहा- ‘अब इस घर को वास्तु के किसी उपाय की जरूरत नहीं है।’ अब चौंकने की बारी स्वामी की थी। उन्होंने पूछा- ‘क्या बात है?’ पंडित ने जवाब दिया, ‘कोई भी जगह जहां आप जैसे लोगों की गरिमामय मौजूदगी हो वह अपनेआप शुभ वास्तु वाली प्रॉपर्टी बन जाती है।’ कुछ साल पहले किसी का सुनाया यह किस्सा मुझे तब याद आया जब मैंने गुरुग्राम के सेक्टर 57, डीएलएफ फेज-3, एलओके1 के रंजन सांगू के बारे में सुना, जो तब बहुत मायूस हो गए जब उनके रहवासी इलाके के एक पुराने पेड़ की पत्तियां सूखने लगीं। जब पत्तियां भूरी पड़ने लगीं तो पक्षी उस पेड़ को छोड़कर चले गए और रंजन को सुबह की चहचहाट का न होना खलने लगा। वे उदास हो गए। इसलिए उन्होंने प्लांट एंबुलेन्स को कॉल किया, जो इसी साल 30 जून को लॉन्च की गई थी, जो पेड़-पौधों को समर्पित है। हालांकि, उन्हें भरोसा नहीं था कि वह एक पेड़ के लिए आ जाएगी। लेकिन, वे आए और उन्होंने जड़ों में कुछ दवाएं डालीं और एक हफ्ते में किसी जादू की तरह पत्तियां हरी होने लगीं। इस एंबुलेन्स का संचालन ‘उत्थान’ एनजीओ करता है। पिछले एक माह में विभिन्न रहवासियों की ओर से आए 85 कॉल्स ने इस एंबुलेंस सेवा को व्यस्त रखा। 30 मामलों पर पूरी तरह गौर किया गया है, जबकि शेष मामलों में इलाज विभिन्न चरणों में है। नेशनल जियोग्राफिक चैनल की सीएसआर शाखा इसमें पैसा लगा रही है, जबकि ‘उत्थान’ प्रोजेक्ट को अमल में ला रही है। संस्था गुरुग्राम के बटरफ्लाई पार्क का संचालन करती है। चेन्नई, वडोदरा और मेरठ सहित कई अन्य जगहों पर ट्री एम्बुलेंस काम कर रही हैं।
फंडा यह है कि  जब किसी का मन अन्य लोगों की ज़िंदगी, शांति और खुशी को तरजीह देता है और दूसरों के बारे में सोचता है तो ऐसा व्यक्ति अनजाने ही संतत्व प्राप्त कर लेता है।
एन. रघुरामन
मैनेजमेंट गुरु
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