तेज-लगातार तेज़’ और ‘क्विक-लगातार क्विक’ कॉर्पोरेट में आगे बढ़ने के नए मापदंड हैं, पर जब जोखिम ज्यादा हो तो निजी तौर पर थोड़ा धीमा होने की जरूरत है

मैं मैनेजमेंट की ‘तेज़ और लगातार तेज़’ थ्योरी में गहरा विश्वास रखता हूं। जब भी मैं छात्रों को संबोधित करता हूं, उन्हें खरगोश-कछुए वाली कहानी याद दिलाता हूं, जिसमें अतिआत्मविश्वास के चलते खरगोश सोता रह जाता है और कछुआ रेस जीत जाता है। मैं उनसे पूछता हूं कि ‘अगर खरगोश को दूसरी बार मौका मिले तो आपकी सलाह क्या होगी?’ तो वे कहते, ‘अंत तक तेज़ दौड़ते रहो।’ और तब मैं उन्हें इस थ्योरी के बारे में सिखाता हूं कि कैसे कॉर्पोरेट जगत में यह आगे बढ़ने में मदद करती है। पर मैं इसके साथ एक बात जोड़ देता हूं कि ‘तेज़ भागने के निर्णय को जोखिम के संदर्भ में भी देखना चाहिए, मेरा मतलब है कि कहीं लगातार तेज़ भागने के चक्कर में खरगोश हार्ट अटैक से न मर जाए।’

प्रबंधन की यह कहानी मुझे याद आ गई, जब पता चला कि एक भारतीय एयरलाइंस पर यूएई के लिए उड़ान भरने से रोक लगा दी गई। यूएई में एयर ट्रांसपोर्ट और इंटरनेशनल अफेयर्स सेक्टर के निदेशक द्वारा भारतीय एयरलाइन को कड़े शब्दों में लिखे गए पत्र में इस निलंबन का कारण कोविड-19 मरीज़ के साथ दूसरी बार यात्रा करना बताया गया था। हालांकि देर शाम को फ्लाइट्स दोबारा शुरू होने की खबर भी आ गई थी। पर जाहिर तौर पर एयरलाइन को ही उस मरीज़ के इलाज और इस मामले से जुड़े सारे खर्च उठाने पड़ेंगे।

यही कारण है कि 17 सितंबर को गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और गोवा की शिक्षा जगत के 45 विशेषज्ञों की वीडियो कांफ्रेंसिंग मीटिंग के बारे में सुनकर थोड़ा चिंतित हो गया, जिसमें 21 सितंबर से कक्षा नवमीं से बारहवीं तक के स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया। हालांकि इसमें दोराय नहीं कि कक्षा की पढ़ाई कक्षा की ही होती है और कंप्यूटर्स के माध्यम से पढ़ाकर उसे नहीं बदला जा सकता, पर मुझे पूरा विश्वास है कि स्कूल आने से पहले वे बच्चों का सख्ती से कोविड टेस्ट सुनिश्चित करेंगे और यह भी देखेंगे कि बच्चे आपस में ना मिलें। अन्य राज्यों के मुकाबले गोवा अभी सुरक्षित राज्य बना हुआ है। देखें कि उन्हीं मुद्दों पर देश के बड़े शहर क्या कड़े कदम उठा रहे हैं।

अहमदाबाद प्रशासन की टीम द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करवाने की मुहिम के बाद अब शहर में अधिकांश चाय वाले, दुकान सील करने और जुर्माने के डर से अपनी दुकानें बंद रख रहे हैं। अिधकारियों ने कहा कि चाय-खानपान की इन टपरियों पर ही आमतौर पर भीड़ जमा होती है इसलिए उन्हें अपनी दुकान बंद रखने के लिए कहा गया है। गुजरात की राजधानी में सड़क किनारे बने कैफे ने गर्म ड्रिंक्स देना बंद कर दिया है, इसके बदले दूसरे आइटम कार में इंतजार कर रहे लोगों तक सीधे पहुंचाए जा रहे हैं।

कोविड से सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई का हाल देखें। यहां की नगर निगम ने स्वच्छता मित्रों और न्यूसेंस डिटेक्टर्स को मास्क ना पहनने पर लोगों से जुर्माना वसूलने का अधिकार दिया है। हर वार्ड में हरेक व्यक्ति अधिकतम एक हजार लोगों से जुर्माना वसूल सकता है और इसका 10% उसे इंसेंटिव के तौर पर मिलेगा। अप्रैल में जुर्माना एक हजार से घटाकर 200 रुपए कर दिया गया। पर इसका सख्ती से पालन की उम्मीद है। इसमें पूर्व सैन्य अधिकारियों की भी मदद ली जाएगी, जिन्हें हर महीने 40 से 50 हजार रुपए दिया जाएगा। इस तरह के सख्त कदम बताते हैं कि खतरा कितना बड़ा है।

फंडा यह है कि ‘तेज-लगातार तेज़’ और ‘क्विक-लगातार क्विक’ कॉर्पोरेट में आगे बढ़ने के नए मापदंड हैं, पर जब जोखिम ज्यादा हो तो निजी तौर पर थोड़ा धीमा होने की जरूरत है।
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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