नित्य कर्म सफलता पाने के लिए नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हम असफल न हों

थोड़ा लड़खड़ाते हुए ही सही, दुनियाभर में कई कंपनियों ने फिर ऑफिस से काम करना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ आने वाले हफ्तों में ऐसा करने का सोच रहे हैं और ज्यादातर महीने के अंत तक ऐसा करने लगेंगे। अगर आप ऑफिस लौटने को लेकर चिंतित हैं तो भगवान कृष्ण से बेहतर शिक्षक कौन होगा, जिनकी जन्माष्टमी हमने बुधवार को मनाई।

यह कहानी महाभारत खत्म होने के बाद घटी थी। यादव कृष्ण से मिलने पहुंचे। बैठक के बाद कृष्ण ने अर्जुन से यादवों को घर छोड़ने को कहा। उन्होंने अर्जुन से कहा कि यात्रा खतरनाक होगी क्योंकि डाकू हमला कर सकते हैं। अर्जुन युद्ध जीतने और कर्ण को मारने के बाद सोचने लगे थे कि वे अजेय हैं। उन्हें लगा कि डाकुओं को हराने के लिए किसी मदद की जरूरत नहीं है क्योंकि उनके पास गांडीव धनुष है। उनके हिसाब से यह छोटा-सा काम था। कृष्ण उनके आत्मविश्वास को देखकर बस मुस्कुरा दिए।

जैसा कि कृष्ण ने अनुमान लगाया था, वापस लौटते हुए डाकुओं ने हमला कर दिया और अर्जुन यादवों को बचाने लगे। उन्होंने अपने धनुष का इस्तेमाल किया लेकिन डाकुओं के दमन में असफल रहे। फिर अंतत: डाकुओं को हराने के लिए कृष्ण को आना पड़ा। अर्जुन यह समझ नहीं पाए कि डाकू उनपर भारी कैसे पड़े?

कृष्ण ने अर्जुन की ओर देखा और कहा, ‘जब तुमने पहला बाण छोड़ा था, तभी डाकू समझ गए कि तुम पहले जैसे कुशल नहीं रहे। उन्होंने अपनी शक्ति और मनोबल बढ़ाया और तुमपर भयंकर हमला किया। अगर तुम्हारा पहला बाण अच्छा होता तो वे समझते कि तुम अजेय हो और पीछे हट जाते। लेकिन दुर्भाग्य से तुम पहले जितने अच्छे नहीं रहे।’

अर्जुन के अहम को चोट पहुंची। वे अपने समय के श्रेष्ठ धनुर्धर थे, फिर वे सर्वश्रेष्ठ कैसे नहीं रह सकते? कृष्ण ने फिर उनसे ऐसे शब्द कहे जो आज भी उपयुक्त हैं। कृष्ण ने कहा, ‘याद है, कर्ण ने महाभारत से पहले कभी युद्ध नहीं लड़ा था लेकिन उसने कभी अभ्यास नहीं छोड़ा। उसके पास विजयधनुष जैसा अजेय हथियार था, लेकिन उसने कभी अभ्यास नहीं छोड़ा।’ फिर कृष्ण ने अर्जुन को नित्य कर्म या रोज अभ्यास का सबक दिया।

यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे हम भविष्य में इस्तेमाल करने के लिए करते हैं। बल्कि यह हम आज और रोज करते हैं ताकि हमारा भविष्य बेहतर हो। अब जब हम सभी अनलॉक का अगला चरण शुरू कर रहे हैं, तो घर में रह रहे लोगों के लिए रोजाना उन कौशलों का अभ्यास जरूरी है, जिन्होंने उन्हें वह बनाया, जो वे आज हैं। हो सकता है हमारे बॉस इस मुश्किल समय में हमसे नए कौशलों की उम्मीद करें। अगर आपका ऑफिस निकट भविष्य में शुरू होने वाला है तो आज से ही ऐसी मेहनत शुरू कर दें जैसे आपने ऑफिस जाना शुरू कर दिया हो। अपने घर के काम समय पर निपटा लें, नहाएं और वर्क फ्रॉम होम वाली स्थिति में भी तैयार हों। इससे आपको घर के बाकी कामों के बोझ के बिना, पहले दिन से ही समय पर ऑफिस पहुंचने में मदद मिलेगी। यह महिला कर्मचारियों पर और ज्यादा लागू होता है, जिनपर घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी है और लॉकडाउन के दौरान वे घर पर रहीं।

फंडा यह है कि नित्य कर्म सफलता पाने के लिए नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हम असफल न हों।
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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