‘पॉजीटिव पीपुल्स क्लब’ और ‘कोविड-19 पॉजीटिव गाइज़’ जैसे वॉट्सएप ग्रुप पर नई दोस्ती शुरू हो रही हैं, जो उन्हें भरोसा है कि जिंदगीभर चलेंगी

Management Funda By N. Raghuraman

उस अस्पताल में खुद को पत्रकार बताने वाले एक मरीज ने, खुद को करोड़पति बता रहे एक दूसरे व्यक्ति से पूछा, ‘आपको जिंदगी में सबसे ज्यादा खुशी किससे मिलती है?’ उस अभिनेता-करोड़पति ने कहा, ‘मैं जीवन में खुशी के चार चरणों से गुजरा और अंतत: मुझे खुशी के सही मायने समझ आए। पहला चरण था दौलत और साधन इकट्‌ठा करना। लेकिन इस चरण में मुझे वो खुशी नहीं मिली जो चाहिए थी। फिर आया मूल्यवान चीजें इकट्‌ठी करने का दूसरा चरण।

फिर बड़े प्रोजेक्ट हासिल करने का तीसरा चरण आया। जैसे फुटबॉल टीम खरीदना, टूरिस्ट रिजॉर्ट खरीदना आदि। लेकिन यहां भी मुझे वह खुशी नहीं मिली, जिसकी मैंने कल्पना की थी। चौथा चरण आया जब मेरे एक दोस्त ने मुझे दिव्यांग बच्चों के लिए व्हीलचेयर्स खरीदने को कहा।’

करोड़पति आगे बोला। ‘मैंने तुरंत कुछ व्हीलचेयर खरीदीं। लेकिन दोस्त ने जोर दिया कि मैं खुद उसे साथ चलकर बच्चों को व्हीलचेयर दूं। मैं तैयार होकर उनके साथ गया। व्हीलचेयर्स देते हुए मैंने बच्चों के चेहरों पर खुशी की अनोखी चमक देखी। वे चेयर्स पर बैठे और यहां-वहां घूमकर उन्होंने मस्ती की। उनके लिए यह पिकनिक की तरह था। लेकिन मुझे असली खुशी तब महसूस हुई जब मैं जाने लगा और व्हीलचेयर में बैठे एक बच्चे ने मेरा पैर पकड़ लिया।

मैंने आहिस्ता से पैर छुड़ाने की कोशिश की लेकिन बच्चे ने मेरे चेहरे की ओर देखा और मेरे पैर और जोर से पकड़ लिए। मैं झुका और बच्चे से पूछा, ‘क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?’ इस बच्चे ने जो जवाब दिया उससे मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उसने कहा, ‘मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और फिर से धन्यवाद दे सकूं।’ यह बोलते हुए उसकी आवाज कांपने लगी।’

कई मरीजों की आंखों में आंसू आ गए। वरिष्ठ मरीज ने वार्ड का माहौल बदलने के लिए जोर से तालियां बजाईं और सभी ने ऐसा ही किया। उस दुनिया में स्वागत है जहां ‘पॉजीटिव’ शब्द सबसे ‘निगेटिव’ शब्द है, जहां यह कहानी सत्र हर रोज हो रहा था। दो लोगों ने स्क्रिप्ट लिखने और नाटक के जरिए हर रात एक कहानी सुनाने की जिम्मेदारी ली ताकि कोविड-19 केयर सेंटर्स (सीसीसी) से निकलने के बाद उनकी जिंदगी पॉजीटिव और कोविड निगेटिव हो सके। यहां सभी को याद है कि कैसे सीसीसी में आने से पहले उन्होंने इन सेंटर्स में कुप्रबंधन की कई कहानियां सुनी थीं।

लेकिन सीसीसी में आने वाले नए व्यक्ति आमतौर पहली चाय के साथ ही उन मेहमानों को देख आश्चर्य में पड़ जाते हैं, जो पॉजीटिव हैं और शायद कुछ दिन सीनियर हैं। फिर पॉजिटिव व्यक्ति को खो-खो मैच देखने के लिए कहा जाता है, जिसमें सीनियर खेलते हैं। अंधेरा होने पर सीनियर कार्ड गेम खेलना शुरू करते हैं और डिनर के बाद दिन का अंत एक कहानी या उनके द्वारा लिखे गए नाटक के साथ होता है, जिसके बारे में आपने शुरुआत में पढ़ा। ‘पॉजीटिव पीपुल्स क्लब’ और ‘कोविड-19 पॉजीटिव गाइज़’ जैसे कुछ नए वॉट्सएप ग्रुप बन रहे हैं, जहां नई दोस्ती शुरू हो रही हैं, जो उन्हें भरोसा है कि जिंदगीभर चलेंगी। ऐसा एक नहीं, देश में कई जगह हो रहा है।

फंडा यह है कि जीवन का दूसरा पहलू देखने के लिए अपनी प्राथमिकताएं बदलिए, जहां लक्ष्य केवल खुशी है।

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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