बच्चों के सामने अपने काम को लेकर सतर्क रहें क्योंकि जहां आपकी कहानी खत्म होती है, वहां से उनकी शुरू होती है

Management Funda By N. Raghuraman

जैक और मैक्स रविवार की प्रार्थना के लिए जा रहे थे। जैक सोच रहा था कि क्या प्रार्थना के दौरान धूम्रपान करना सही होगा। मैक्स ने जवाब दिया, ‘तुम पादरी से पूछ लो।’ जैक ने पादरी के पास जाकर पूछा, ‘क्या मैं प्रार्थना के वक्त धूम्रपान कर सकता हूं?’ पादरी ने जवाब दिया, ‘नहीं, मेरे बच्चे, बिल्कुल नहीं।

यह हमारी आस्था का अपमान है।’ जैक ने दोस्त के पास वापस आकर बताया कि नेक पादरी ने क्या कहा। मैक्स बोला, ‘मुझे आश्चर्य नहीं है। तुमने सवाल ही गलत पूछा था। मैं कोशिश करता हूं।’ फिर मैक्स ने पादरी के पास जाकर पूछा, ‘क्या मैं धूम्रपान के दौरान प्रार्थना कर सकता हूं?’ पादरी ने उत्साह से जवाब दिया, ‘बिल्कुल मेरे बच्चे, बिल्कुल।

तुम जब चाहो प्रार्थना कर सकते हो।’ कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि आपको मिलने वाली अनुमति आपके पूछने के तरीके पर निर्भर करती है। अगर आप सोच रहे हैं कि यह कहानी का अंत है, तो जवाब है नहीं। मैं यह बताने के बाद इसका दूसरा हिस्सा जारी रखूंगा, कि मुझे यह कहानी क्यों याद आई। इस सोमवार महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा पर कालघाट सेंधवा टोलगेट पार करते समय मेरी कार को कैश पेमेंट की लाइन में देर तक इंतजार करना पड़ा क्योंकि मेरे पास ‘फास्टटैग’ नहीं है। अचानक कई गाड़ियां मेरे दाहिने ओर से आगे निकली गईं, ट्रक ड्राइवरों से कुछ कहा और लाइन तोड़कर तेजी से चली गईं।

पीछे बैठकर मुझे लगा कि कारों को विशेष अनुमति है और मैंने ड्राइवर से अगले टोल पर ऐसा ही करने को कहा। लेकिन जब मैंने खिड़की खोली और ट्रक ड्राइवर से लाइन तोड़कर जाने का निवेदन किया तो उसने इंकार कर दिया और पीछे जाकर लाइन में लगने को कहा। जबकि मेरे पीछे की कार वाले उसी ट्रक ड्राइवर को राजी कर निकल गए।

तब मुझे अहसास हुआ कि उन्होंने ‘मेरे बच्चे की तबीयत ठीक नहीं है, जल्दी डॉक्टर के पास ले जाना है’ जैसी कोई दु:खद कहानी इस्तेमाल की थी। टोल चुकाने के बाद वे खुश थे कि वे गरीब ट्रक ड्राइवर को झांसा देकर लाइन तोड़ने में कामयाब रहे। कार में बैठे बच्चे खुश थे कि उनके पिता कितने होशियार हैं! अब कहानी को दूसरा हिस्सा: मेरे हिसाब से जैक की सोच नैतिक है, जबकि मैक्स की सोच कपटपूर्ण उद्देश्य से चलती है। जैक को धूम्रपान की अनुमति न मिलने से अफसोस हुआ होगा लेकिन यह अनंत तसल्ली रहेगी कि उसने अपने गड़रिए (ईश्वर) के निर्देश का पालन किया।

वहीं मैक्स इस बात पर खुश हो सकता है कि किसी भी तरह अपना लक्ष्य पाने के लिए उसने बड़ी होशियारी से अपनी मंशा जताकर पादरी को छल लिया, लेकिन दिल के एक कोने में उसे हमेशा यह चुभन रहेगी कि उसने धोखा दिया। साथ ही उसे तब दु:ख होगा, जब उसका बेटा, जो अभी बच्चा है, बड़ा होकर ऐसा ही कुछ करेगा।

लेकिन कोई यह तर्क दे सकता है कि कलियुग में लोग मैक्स के तरीकों से ही अमीर हो रहे हैं। लेकिन वे शायद ही समझते हैं कि उनके काम ने अगली पीढ़ी के लिए मूल्यों की व्यवस्था पूरी तरह मिटा दी है। अगर आपके काम नैतिक उद्देश्य और विचार से होते हैं। तो आपको ईश्वरीय आशीर्वाद की आत्मानुभूति का आनंद मिलेगा क्योंकि आप उस दिव्यता का ही बहुत छोटा हिस्सा हैं। अनैतिक तरीके अपनाकर, आसानी से कमाए गए पैसों से मिले संतोष की तुलना में यह आपको असीमित मानसिक संतुष्टि देगा।

फंडा यह है कि बच्चों के सामने अपने कार्यों को लेकर सावधान रहें क्योंकि जहां आपकी कहानी खत्म होती है, वहां से उनकी शुरू होती है।

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

Leave a Reply