महिलाएं सिर्फ सीमा पर सेना का पेट भरने और चुनाव जिताने का काम नहीं करतीं, बल्कि आतंकवाद से लड़ने के लिए हथियार भी उठा सकती हैं

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

सोमवार को आए आम बजट में महिला सशक्तिकरण से जुड़े कुछ प्रावधान भी किए गए। उल्लेखनीय कदम यह है कि महिलाएं अब नाइट-शिफ्ट समेत किसी भी शिफ्ट में काम कर सकेंगी। इसके लिए सुरक्षा संबंधी खास कदम उठाए जाएंगे।

महिला सशक्तिकरण से जुड़े इस कदम से मुझे हाल ही में वायरल हुआ वह वीडियो याद आया, जिसने डाक विभाग अधिकारियों को इससे जुड़ा डाक टिकट जारी करने को मजबूर कर दिया। यह वीडियो पुणे से 60 किमी दूर पालु गांव की रेणुका गुरव का था। इसमें वे 18 जनवरी को पंचायत चुनावों में जीत हासिल करने वाले अपने पति को कंधे पर लेकर चलती दिख रही थीं।

इसने पुणे के जनरल पोस्ट ऑफिस अधीक्षक का ध्यान खींचा। इस शनिवार अधिकारियों ने तय किया कि इस पल और ‘महिला सशक्तिकरण’ की सराहना के रूप में दंपति की तस्वीर वाला डाक टिकट जारी किया जाए। दंपति ने सहर्ष सहमति दे दी। डाक विभाग ने रेणुका को सर्टिफिकेट और उसके डाक डिकट की प्रति दी। इस टिकट के सोमवार तक आम जनता को उपलब्ध होने के आसार हैं। मतदाताओं को मनाने में रेणुका की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे उसके पति संतोष गुरव को जीत मिली।

हाल ही में हमने पढ़ा कि लद्दाख में महिलाओं का समूह एक एलपीजी प्लांट चलाकर यह सुनिश्चित करता है कि चीनी सेना पर नजर रखने वाले 50 हजार भारतीय सैनिकों को भीषण ठंड में खाली पेट कदमताल न करनी पड़े। प्लांट को सरकारी इंडियन ऑइल ने बनाया है। यह लद्दाख में रसोई गैस का एकमात्र स्रोत है और बर्फबारी से रोड बंद होने पर यह जीवनरेखा साबित होता है। प्लांट में होने वाले लगभग 40% रिफिल रक्षा संस्थानों में जाते हैं। यह केवल महिलाओं द्वारा चलाई जा रही देश की एकमात्र एलपीजी यूनिट है।

लेकिन हममें से ज्यादातर ने ‘कोबानी की बेटियों’ के बारे में नहीं सुना होगा। यह इस्लामिक इस्टेट से लड़कर जीतने वाली महिलाओं के साहस की अनोखी कहानी है।

उत्तरपूर्वी सीरिया के इस्लामिक स्टेट ने 2014 में शहर दर शहर आतंक फैलाते हुए देश को गृह युद्ध की आग में झोंक दिया था। ऐसी जगह पर शायद ही महिला अधिकारों पर आधारित क्रांति की उम्मीद हो। लेकिन उस साल, कोबानी नाम के अनजान-से शहर में केवल महिला सदस्यों वाली एक नागरिक सेना आईएसआईएस से भिड़ गई। कोबानी में इस असंभव मुकाबले से एक लड़ाकू सेना उभरी, जिसने अमेरिका के साथ पूरे उत्तरी सीरिया में आईएसआईएस के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।

इस पक्रिया में, इन महिलाओं ने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण का विस्तार किया और महिलाओं को खरीदने-बेचने वाले पुरुषों से लड़ते हुए महिलाओं को समानता दिलाने का निश्चय किया। उन्होंने यह लड़ाई घर-घर, शहर दर शहर लड़ी।

पिछले हफ्ते पूर्व यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट हिलेरी क्लिंटन, उनकी बेटी चेल्सी क्लिंटन और सैम ब्रैनसन द्वारा शुरू की गई प्रोडक्शन कंपनी हिडनलाइट प्रोडक्शन्स ने बेस्ट-सेलिंग लेखिका गेल जेमाख लेमान की किताब ‘द डॉटर्स ऑफ कोबानी’ के अधिकार सीरीज बनाने के लिए खरीदे हैं। क्लिंटन ने कहा, ‘हमने ऐसे जाने-अनजाने हीरोज की कहानी सामने लाने के लिए हिडनलाइट की शुरुआत की है, जिनके साहस को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।’

फंडा यह है कि महिला शक्ति की सराहना कीजिए क्योंकि वे सिर्फ सीमा पर सेना का पेट भरने और चुनाव जिताने का काम नहीं करतीं, बल्कि आतंकवाद से लड़ने के लिए हथियार भी उठा सकती हैं।

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