मौजूदा समय में करुणा सबसे बड़ा सबक है, जिसे दुनिया को सीखने की जरूरत है और रामायण अन्य मानवीय गुणों के साथ करुणा भी प्रदान करती है

मैं अपनी मां, उनके माता-पिता और कई धार्मिक गुरुओं से रामायण सुनते हुए बड़ा हुआ। एक बात जो मुझे चौंकाती थी, वह थी सीता की उन राक्षसियों के प्रति करुणा, जो न सिर्फ अशोक वाटिका की रक्षा करती थीं बल्कि अपने स्वरूप और व्यवहार से सीता को भयभीत भी करती थीं। जब हनुमान उन्हें रावण की मृत्यु का समाचार देने पहुंचे तो प्रसन्न सीता ने हनुमान से वरदान मांगने कहा। हनुमान राक्षसियों के प्रति गुस्से से भरे थे और उन्हें मारने के लिए सीता से अनुमति चाहते थे। लेकिन कई कथा वाचकों के मुताबिक सीता बोलीं कि असहाय राक्षसियां केवल दुष्ट रावण के निर्देशों का पालन कर रही थीं और उन्हें सजा देने उचित नहीं है। मुझे यह कहानी इस बुधवार को याद आई जब अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन शुरू हुआ।

रामायण के बारे में रोचक बात यह है कि एशिया के कई देशों ने इसे अपनी संस्कृति और लोककथाओं का हिस्सा बनाया है और इससे जुड़ी कलाएं विकसित की हैं। मंगोलिया से लेकर जापान, म्यांमार, लाओस, कम्बोडिया, थाईलैंड, फिलीपीन्स और इंडोनेशिया तक, कई देशों ने रामायण के सबकों को अपनी लोककथाओं में जगह दी है। जैसे इंडोनेशिया में वायांग, रामायण और महाभारत आधारित शैडो पपेट (कठपुतलियों की परछाईं) थियेटर है और थाईलैंड में राम-आख्यान डांस थियेटर है। मैंने खुद कम्बोडिया में स्थित सबसे बड़े हिन्दू मंदिर ‘अंगकोर वाट’ में ‘स्ट्रीट रामायण’ देखी है। और ज्यादातर लोककथाएं बहुत करुणामयी हैं।

करुणा एक बहुत परिपक्व शब्द है, जो परिपक्व लोगों में ही होती है। हमारे जैसे बच्चों को यह भारी-भरकम शब्द सिखाने के लिए दादा-दादी, नाना-नानी एक लोककथा सुनाते थे। एक बार जंगल में एक शिकारी शेर के शिकार के दौरान गिर गया और हथियार खो बैठा। शेर शिकारी का पीछा करने लगा। शिकारी दौड़कर एक पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ पर उसने देखा कि एक भालू बैठा है। शिकारी पूरी तरह असहाय हो गया और उसने भालू से जान बख्शने का निवेदन किया। इस बीच शेर पेड़ के नीचे आ गया और उसने भालू को उकसाया कि वह शिकारी को धक्का दे दे, फिर दोनों मिलकर उसे खाएंगे। भालू ने यह कहकर इनकार कर दिया कि शिकारी उसकी शरण में आया है।

कुछ समय बाद भालू को नींद आने लगी और शेर ने शिकारी से कहा, ‘मैं बहुत भूखा हूं। तुम सोते हुए भालू को पेड़ से धक्का दे दो ताकि मैं उसे मारकर खा सकूं और तुम आजाद हो जाओ।’

कृतघ्न शिकारी अपने जीवन को लेकर इतना चिंतित था कि उसने सोते हुए भालू को धक्का दे दिया। भालू किसी तरह जाग गया और एक डाल पकड़कर बच गया। शेर ने भालू से कहा कि उसने शिकारी को बचाने की कोशिश की लेकिन वह इतना कृतघ्न निकला कि उसने तुम्हें धक्का दे दिया। इसलिए भालू को अब शिकारी को धक्का देकर शेर की मदद करनी चाहिए। पुण्यात्मा भालू ने जवाब दिया कि महान आत्माएं कभी दूसरों के प्रति बैर नहीं रखतीं और करुणामयी होना उनका स्वभाव होता है, फिर भले ही दूसरे बुरा बर्ताव करें। इस तरह भालू अपने सिद्धांतों पर अडिग रहा और उसने शिकारी को नुकसान नहीं पहुंचाया, जो भालू का व्यवहार देख बहुत शर्मिंदा हुआ।

फंडा यह है कि मौजूदा समय में करुणा सबसे बड़ा सबक है, जिसे दुनिया को सीखने की जरूरत है। और रामायण अन्य मानवीय गुणों के साथ करुणा भी प्रदान करती है।

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