रिमोट वर्किंग रियल एस्टेट इंडस्ट्री को बदल रही है, आपके पास हरियाली और पहाड़ों के पास कुछ जमीन है, तो इस अवसर पर विचार करें

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

मैं कम से कम ऐसे 6 लोगों को जानता हूं जो काम और आनंद को मिला नहीं पाते। वे आधुनिक आईटी कंपनियों में काम करते हैं और वीकेंड पर नजदीकी हिल स्टेशन जाते हैं, जहां दो से आठ घंटे रुककर हरियाली, बर्फ से ढंके पहाड़ देखते हैं और ठंडी बयार का लुत्फ उठाते हैं। लेकिन जब महामारी के कारण लगी पांबदियों से उन्हें कहीं से भी काम करने का अवसर मिला, तो उन्होंने जुनून को काम में मिलाने का फैसला लिया।

उन्हें बिल्डर से कार और मेडिकल सुविधा के साथ ‘वाई-फाई रेडी रो-हाउस’ का ऑफर मिला। छ: में से पांच ने यह ऑफर ले लिया। पिछले 45 दिनों से वे वहां रह रहे हैं। दो ने तीन बेडरूम किचन वाले रो-हाउस को दूसरे घर के रूप में खरीद लिया है, यह समझते हुए कि चीजें सामान्य होने और उन्हें मुंबई वापस जाने में समय लगेगा।

कोविड-19 के कारण आए वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) ट्रेंड ने साबित किया है कि ऑफिस के सख्त माहौल की तुलना में घर के आराम में भी बहुत काम कर सकते हैं। लेकिन डब्ल्यूएफएच ने कई मेट्रो शहरों में किराये के घरों के मार्केट को परेशानी में डाल दिया है। वहीं शहरों की तुलना में हरियाली वाले इलाकों में किराया दोगुना हो गया है। ये किरायेदार मुंबई में 50,000 रुपए प्रतिमाह से ज्यादा किराया दे रहे थे। जबकि नए रो-हाउस उन्हें केवल 15,000 में मिल रहे हैं।

आज मेरे पांच परिचितों को इगतपुरी, सापुतारा, शिरडी और कसारा घाट जैसी जगहों पर पहुंचना आसान है। ये उनके घर से 45 मिनट से एक घंटे की दूरी पर हैं। इससे वे पहाड़ों और हरियाली में पहुंच पा रहे हैं, और तंग शहरों से दूर भी हो रहे हैं, जिनमें लॉकडाउन और कोऑपरेटिव सोसायटियों की पाबंदियों के कारण लोग घरों में कैद हैं।

जिन घरों में पति-पत्नी दोनों नौकरी में हैं, वहां अलग कहानी है। महामारी से पहले मेहमानों सहित सभी 800 वर्गफीट के घर में रह पाते थे क्योंकि ज्यादातर समय दंपति बाहर रहते थे। लेकिन जब दंपति घर में काम के कॉल करने लगे, तो शोर से बचना नामुमकिन हो गया।

जब मैंने पता किया कि उन्हें नई जगह कैसे मिली, तो पता चला कि बिल्डर ने इन आईटी कर्मचारियों से संपर्क किया था। उसने रिमोट वर्किंग में उनकी जरूरतें समझने के लिए सर्वे किया और एक हफ्ते बाद ऐसे ऑफर के साथ आया, जिसे न नहीं कहा जा सकता।

शहरी थकान से दूरी, कम कीमत और अंदर-बाहर ज्यादा जगह के कारण सिर्फ मुंबईकरों के लिए ही परिदृश्य नहीं बदला, बल्कि हरे-भरे राज्यों में भी ऐसा हो रहा है। जैसे केरल के कोच्चि में 35000 कर्मचारियों में केवल 1500 ऑफिस आ रहे हैं, जबकि ज्यादातर किराया बचाने के लिए या तो गांव चले गए हैं या ऐसी जगह, जहां परिवार की कोई प्रॉपर्टी है। इसका नतीजा यह हुआ कि इंफो पार्क के आस-पास 10 हजार से ज्यादा फ्लैट खाली पड़े हैं।

यहां तक कि अमेरिका में भी केप कॉड, मैसाचुसेट्स और पाम बीच जैसे पूर्वी तटीय इलाकों में बोस्टन और न्यूयॉर्क सिटी से रहवासी आ रहे हैं। वे वहां दूसरा घर खरीद रहे हैं। अचानक इन छोटी जगहों पर 16 हजार रिमोट वर्कर्स की बाढ़ आ गई है।

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