बच्चों को खुद से ज्यादा से ज्यादा चीजें करने दें क्योंकि इससे भविष्य में उन्हें उस दुनिया से ढेर सारा पैसा बचाने में मदद मिलेगी

Management Funda by N. Raghuraman

आठ साल पहले, अमेरिका में फ्लोरिडा के ओरलांडो शहर के रॉब ग्रीनफील्ड यह वास्तविकता जानकर चौंक गए कि वे जो भी खाना खा रहे थे, उसका फायदा उसे उगाने वाले किसान को नहीं, बल्कि बड़ी औद्योगिक कृषि कंपनियों को मिल रहा था।

प्रकृति ही उनका रसोई भंडार और दवा की दुकान

वे अचानक हमारे खाद्य तंत्र को लेकर सजग हो गए। उन्हें लगा कि उनके खाने का हर एक निवाला दुनिया को बर्बाद कर रहा है। फिर नवंबर 2018 में उन्होंने खुद से पूछा, ‘क्या मैं जो खाना खाता हूं, उसे पूरी तरह खुद उगाकर खा सकता हूं?’ आश्चर्यजनक रूप से वे सफल रहे। पहले उन्होंने पारंपरिक खाद्य तंत्र से पीछे हटकर पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने का फैसला लिया। उन्होंने स्थानीय किसानों, बागवानों और खाद्य सामग्री इकट्‌ठा करने वालों से हर मौसम में सर्वश्रेष्ठ चीजें उगाना सीखने में मदद ली। वे कभी किराना दुकान, रेस्त्रां और यहां तक कि बार में पीने भी नहीं गए।

प्रकृति ही उनका रसोई भंडार और दवा की दुकान रही है। उनकी खुद की जमीन नहीं है लेकिन उन्होंने पड़ोसियों की घरों के आंगनों में खाना उगाने में मदद की और अपना उगाया खाना साझा किया। वे 100 तरह की खाने की चीजें, पोषण से भरी दर्जनों हरी सब्जियां, स्वादिष्ट फल, जड़ी-बूटी और स्वाद के लिए मिर्च उगाते हैं। नमक भी वे समुद्र के पानी को उबालकर निकालते हैं। उनके खुद के कॉफी के बीज हैं। वे अदरक, हल्दी, औषधीय चाय पत्ती, एल्डरबैरी उगाते हैं, जिनसे सर्दी-जुकाम होने पर वे खुद ही सिरप बना लेते हैं। विटामिन के लिए मोरिंगा (सहजन) की पत्तियां इस्तेमाल करते हैं।

वे प्रकृति में जो उगाते हैं, उससे दर्जनों स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन बनाते हैं। ताजा उत्पादों की परियोजना को अपने और पड़ोसियों तक सीमित न रखते हुए अब रॉब ने ‘गार्डंस फॉर द पीपल’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत वे ओरलांडो और मध्य फ्लोरिडा के कम आय वाले ऐसे घरों में बगीचे बनाते हैं, जिनमें रहने वाले आमतौर पर ताजा खाने का खर्च नहीं उठा पाते। मुझे रॉब की कहानी तब याद आई, जब मैंने केरल के कोझिकोड से 12वीं के छात्र अद्वैत के. के बारे में सुना।

पुरानी बाइक से एक बहुउपयोगी कृषि मशीन बनाई

अद्वैत ने लॉकडाउन के दौरान पुरानी बाइक से एक बहुउपयोगी कृषि मशीन बनाई है। सौर ऊर्जा से चलने वाली मशीन को घास काटने, खेत जोतने, गड्‌ढे भरने, बीज बोने और सिंचाई के साथ उन जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां ट्रैक्टर नहीं पहुंच पाते। इसमें काम के दौरान टायर कीचड़ में फंसने पर मशीन अपने आप बाहर निकाले की सुविधा भी है। अद्वैत को इसे बनाने और टेस्ट करने में 6 महीने लगे। करीब 80% मशीन कबाड़ के सामान से बनी और 12,000 रुपए लागत आई। उसकी मशीन का वीडियो वायरल होने पर सभी उसकी सराहना कर रहे हैं और अब वह मशीन का एडवांस मॉडल बनाने में व्यस्त है।

जब आपको लगे कि आप जो उत्पाद चाहते हैं, उसकी कीमत ज्यादा है या उनकी गुणवत्ता आपके मुताबिक नहीं है या आप जो भी इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे दुनिया को नुकसान हो रहा है, तो रॉब ग्रीनफील्ड या स्कूली लड़के अद्वैत की तरह खुद उसे बनाने या उगाने की चुनौती लें। अब से बच्चों को खुद से ज्यादा से ज्यादा चीजें करने दें क्योंकि इससे भविष्य में उन्हें उस दुनिया से ढेर सारा पैसा बचाने में मदद मिलेगी, जो व्यावसायिक रूप से शोषण करती है। साथ ही उन्हें बेहतर जिंदगी जीने में मदद मिलेगी।

फंडा यह है कि व्यावसायिक शोषण से आजादी पाने और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने का एक ही तरीका है, आत्मनिर्भर बनना।

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

Leave a Reply