हमारी जिंदगी के लिए अच्छी सेहत और ऐसे कई शुभचिंतक जरूरी हैं, जो हमें चाहते हैं, आशीर्वाद देते हैं, हमारी परवाह करते हैं

रजनीकांत 2002 की असफल फिल्म ‘बाबा’ के अंत में संन्यास से सामाजिक-राजनीतिक जीवन में वापसी करते हैं। इस मंगलवार को उन्होंने यही थीम आभासी रूप से दोहराई, लेकिन उल्टे क्रम में। उन्होंने अपनी सेहत को ज्यादा जरूरी बताते हुए राजनीतिक पार्टी बनाने का वादा वापस ले लिया। उन्होंने अपने बीमार होने को ‘ईश्वर की चेतावनी’ बताया और फैन्स से माफी मांगी।

रजनीकांत ही नहीं, उनसे कम मशहूर,कई हिन्दी फिल्मों व सीरियलों में काम कर चुकीं अभिनेत्री, टीवी शो होस्ट और रेडियो जॉकी श्रुति सेठ ने भी ऐसा ही कुछ कहा। श्रुति ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वे अस्पताल के बिस्तर पर नजर आ रही हैं। साथ में लंबा कैप्शन है, ‘2020 ने जाते-जाते मुझे और मेरे परिवार को झटका दे ही दिया। मुझे इमरजेंसी सर्जरी करवानी पड़ी। मुझे लगता है कि मैंने वह सबक नहीं सीखा, जो सीखना था। लेकिन अब मुझे सीख मिल गई है। मैंने सीखा है कि कभी भी अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें।

अस्पताल आपको अहसास कराते हैं कि दिखावा, अहम, शख्सियत और जिंदगी के अनुभवों के तले, हम सब सिर्फ बायोलॉजी हैं।’ इस आत्म-सुधार और मशहूर लोगों के मशविरों से दूर, हम लोग इस साल ज्यादातर घर में ही रहे और हमने जिंदगी के सरल आनंदों को फिर खोजा। ये आनंद हमें दिखाने के लिए हम 2020 के अहसानमंद हैं।

ये रहे शीर्ष 10 आनंद:
1. लोगों को अहसास हुआ कि आरओआर (रिटर्न ऑन रिलेशनशिप), आरओआई (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) से ज्यादा महत्वपूर्ण है। कॅरिअर की चूहा-दौड़ में लगने की बजाय वे परिवारों में निकट संबंधियों के प्रति संवेदनशील हो रहे हैं।

2. हमने न सिर्फ परिवार के साथ समय बिताना सीखा है, बल्कि अब उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताते हैं।

3. किसी भी गैर-कामकाजी महिला से पूछिए कि वे क्या करती हैं, तो जवाब होगा, ‘बस हाउसवाइफ हूं।’ लेकिन 2020 ने उन्हें ‘होम शेफ्स’ की नई पदवी दी और उन्हें परिवार को आर्थिक योगदान देने का रास्ता दिया।

4. कामकाजी महिलाओं ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) और ‘वर्क फॉर होम’ (घर के लिए काम) के बीच जीवन का संतुलन बनाना सीखा।

5. पुरुषों को अहसास हुआ कि घर के रोजमर्रा के कामों में भाग लेने से साथी से निकटता बढ़ती है।

6. दंपती इस बात का आनंद ले रहे हैं कि दिन के अलग-अलग वक्त पर घर कैसा दिखता है। बागवानी, बच्चों को बढ़ते देखना और चिड़ियों की चहचहाहट, ऐसी चीजें जिंदगी को यादगार बना रही हैं।

7. शादी समारोह सीमित हो गए हैं लेकिन हमने जाना है कि तकनीक की मदद से कैसे दुनियाभर से अपने बच्चों के लिए आशीर्वाद पा सकते हैं।

8. हमें अहसास हुआ है कि हम जो खाते हैं, वही हो जाते हैं। इसीलिए हम विभिन्न भोजन चुनने की बजाय भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान दे रहे हैं।

9. नेटवर्किंग का स्तर सुधरा है। हमने हमारी जिंदगी को सकारात्मक बनाने में योगदान देने वाले ‘रियल हीलर’ (राहत देने वाले) से जुड़े रहना सीखा है और अब उन्हें हर शुक्रवार की शाम किसी बड़ी पार्टी में नहीं तलाशते हैं।

10. तकनीक की वजह से हम न सिर्फ कम यात्रा कर रहे हैं, बल्कि इसने आभासी रूप से ही सही, हमारी हर जगह पहुंचने में मदद की है, फिर वह जन्म हो या मृत्यु, अस्पताल में देखभाल हो या अदालती सुनवाई, शिक्षा हो या इमरजेंसी। कुलमिलाकर हमने जाना कि तकनीक सिर्फ सुविधासंपन्न लोगों के लिए नहीं है।

फंडा यह है कि 2020 ने हमें सबसे बड़ी सीख दी है कि हमारी जिंदगी के लिए अच्छी सेहत और ऐसे कई शुभचिंतक जरूरी हैं, जो हमें चाहते हैं, आशीर्वाद देते हैं, हमारी परवाह करते हैं।

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