हमारे सभी साथियों के लिए एक प्रेरणा है कि वे सकारात्मक बने रहें क्योंकि हर सूर्यास्त के बाद फिर सूर्योदय होता है

अलग समय में अलग फैसलों की जरूरत होती है, जिन्हें कभी-कभी मुश्किल मान सकते हैं, लेकिन लंबे समय में वे पूरे समाज या राष्ट्र को बढ़ाने के लिए अच्छे हैं। यहां संगठनों, पेशेवरों और व्यक्तिगत स्तर पर लिए गए ऐसे प्रभावशाली फैसले दिए जा रहे हैं, जिनके बारे में मुझे बुधवार को पता चला।
उदाहरण 1: कई बिजनेस मिलकर एक एसोसिएशन बनाते हैं ताकि उनकी सम्मिलित शक्तियां सरकार से छूट के लिए मोलभाव करने या अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं उठाने में मदद कर सकें, जिनमें लाइसेंसिंग के मुद्दे के अलावा बिजनेस प्रभावित करने वाले मुद्दे शामिल हैं।
जब गोवा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआई) को हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के सदस्यों से शिकायतें मिलीं कि बड़ी संख्या में खाने की दुकानें घरों से चल रही हैं और इससे पहले ही नुकसान झेल रहा सदस्यों का बिजनेस और प्रभावित हो रहा है। तब जीसीसीआई ने समझदारी से काम किया। चैंबर की प्रबंधन समिति ने माना कि घर से या पैक कर खाना देने वाली ये दुकानें इस समय जरूरत हैं। इनसे कई बेरोजगारों को आजीविका कमाने में मदद मिल रही है, जो लॉकडाउन की वजह से नौकरी या बिजनेस खो बैठे हैं। इसलिए जीसीसीआई ने ऐसे आंत्रप्रेन्योर्स को जरूरी अनुमतियां दिलाने के साथ मार्केटिंग और वित्त संबंधी मदद देने का फैसला लिया। चैंबर ने उन्हें साफ-सफाई बनाए रखने और पैकेजिंग समेत कई चीजें भी सिखाईं ताकि वे समय के साथ सामान्य बिजनेस के रूप में आगे बढ़ें।
उदाहरण 2: वायरस के हमले से बचने के लिए सरकारी तैयारियां कम पड़ने पर रिटायर्ड डॉक्टरों को मैदान में उतारने के प्रस्ताव पर काफी बहस हुई। लेकिन किसी ने भी यही तरीका शिक्षा में अपनाने के बारे में नहीं सोचा। जब दुनिया के हर हिस्से में शिक्षण लगभग ऑनलाइन होने लगा तो कई लोगों ने लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे गैजेट्स रिसायकल कर उन बच्चों की मदद की कोशिश की, जो इन्हें खरीद नहीं सकते। बिजली और इंटरनेट की उपलब्धता एक और समस्या है।
यही कारण है कि पुणे से 175 किमी दूर कराड म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन स्कूल के प्राचार्य अर्जुन कोली को खुशी हुई जब 35 रिटायर्ड शिक्षकों ने उनकी वाड़ियों (मोहल्लों) के छात्रों को पढ़ाने की इच्छा जाहिर की। विभिन्न विषयों में 36 वर्ष का अनुभव रखने वाले शिक्षकों ने रोजाना दो घंटे की क्लास देना और पिछले दो महीनों में इलाके के हर छात्र तक पहुंचना शुरू किया है। इस स्कूल में करीब 2500 छात्र हैं जो 20 किमी के दायरे में रहते हैं। स्कूल रिटायर्ड शिक्षकों को प्रारूप भेजता है और वे सफर कर हर वाड़ी के 7-8 छात्रों के छोटे बैच को पढ़ाने जाते हैं।
उदाहरण 3: वकील के. उत्तमकुमारन उस जनजातीय समुदाय से आते हैं जिनका पैतृक काम जंगली खजूर के पत्तों से टोकरियां बुनना है। बारहवीं तक पढ़ाई पूरी करने के बाद वे पिता की बुनाई के व्यापार में मदद कर रहे थे क्योंकि यही परिवार की आय का स्रोत था। फिर 2010 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे परिवार की पहली ग्रैजुएट पीढ़ी बने और थंजावर में पट्‌टूकोट्‌टई कोर्ट में वकालत शुरू की। हालांकि महामारी और लॉकडाउन से सभी वकीलों की आय कम हो गई क्योंकि अदालतों ने केवल जरूरी मामलों की सुनवाई का फैसला लिया। उत्तमकुमारन दोबारा टोकरियां बुनने लगे। उनकी परेशानी के बारे में पता चलने पर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीआर रामच्रंद्र मेनन ने 10 हजार रुपए ‘उपहार’ में भेेजे। साथ ही स्पष्ट करते हुई चिट्‌ठी लिखी कि यह राशि ‘उपहार’ है, ‘दान या योगदान’ नहीं। उन्होंने लिखा, ‘आपकी मेहनत के लिए प्रतिबद्धता पहचान और सराहना की हकदार है। यह हमारे सभी साथियों के लिए एक प्रेरणा भी है कि वे सकारात्मक बने रहें क्योंकि हर सूर्यास्त के बाद फिर सूर्योदय होता है।’

फंडा यह है कि हटकर सोचें, इंसानियत बनाए रखें और मुश्किल समय को हराने के लिए मुश्किल फैसले लें।

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