हवाईयात्रा निश्चित रूप से सुरक्षित है, अगर आप अपनी यात्रा की शुरुआत से लेकर मंजिल तक पहुंचने से जुड़े हर कार्य में विज्ञान की समझ को लागू करते हैं

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

सात मार्च 2020 के बाद 7 दिसंबर को यह मेरी पहली हवाईयात्रा थी। लॉकडाउन खुलने के बाद से मेरी सभी यात्राएं कार से हुईं, फिर वे कितनी ही मुश्किल रही हों। मैं रोजाना कम से कम 400 किमी सफर करता था। लेकिन सोमवार को मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से किसान आंदोलन देखने के लिए मैंने इंदौर से दिल्ली फ्लाइट से जाने का फैसला लिया।

मेरे मन में एक ही सवाल घूम रहा था, जिसका एयरलाइन में कार्यरत मेरे कई दोस्त संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। सवाल था, अभी हवाईजहाज से जाना कितना सुरक्षित है?

सबसे पहले मैंने अपने सूत्रों से पता किया कि दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कितनी भरी हैं। मैंने सबसे कम भीड़ वाली फ्लाइट चुनी, हालांकि वह थोड़ी महंगी थी। मैं दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंच गया। मैंने एयरपोर्ट में एयरक्राफ्ट का आना-जाना भी देखा और तब एयरपोर्ट के अंदर गया, जब वहां कम यात्री आ-जा रहे थे। दो घंटे जल्दी पहुंचने से मुझे आराम से औपचारिकताएं पूरी करने का समय मिल गया, उन यात्रियों से टकराए बिना, जिन्हें हमेशा जल्दी रहती है, पर कभी समय पर नहीं पहुंचते!

मैंने सिक्योरिटी चेकिंग की लाइन में सभी को मुस्कुराते हुए आगे जाने दिया। कई लोगों ने सोचा कि मैं पागल हूं और इसका लाभ उठाया। लेकिन परवाह किसे है? मैंने एयरपोर्ट में बैठकर मेरे दोस्त से वॉट्सएप चैट शुरू की, जो एयरोस्पेस एयरक्राफ्ट सिस्टम इंजीनियर है। उसने बताया कि प्लेन की हवा किसी भी ऑफिस बिल्डिंग और घर से ज्यादा बेहतर ढंग से फिल्टर होती है।

ज्यादातर हवाईजहाजों में ‘हाई एफीशिएंसी पार्टिकुलेट एयर फिल्टर्स’ (एचईपीए) होते हैं, जो 99.97% कण रोक सकते हैं। प्लेन केबिन में मौजूद केवल 25% हवा रिसायकिल करता है, जबकि 75% हवा थोड़ी-थोड़ी देर में बाहर निकाल दी जाती है, यानी केबिन में हर पांच मिनट में नई हवा भर जाती है। यह जानकर मुझे संतुष्टि हुई और मैं फ्लाइट में बैठा।

मेरी चाल कामयाब रही। फ्लाइट लगभग खाली थी और क्रू ने मुझे छह सीट वाली पूरी खाली पंक्ति दे दी। एक अध्ययन का दावा है कि अगर आपकी दोनों तरफ यात्री न हों तो संक्रमण का जोखिम 40% तक कम हो जाता है।

आकाश में क्रू ने खाना दिया, जिसे मैंने तुरंत नहीं खाया। मेरे महामारीविशेषज्ञ एक दोस्त ने चेताया था कि चूंकि एयरलाइन सभी को एक साथ खाना देती हैं और सभी एक साथ मास्क उतारकर खाने लगते हैं, इसलिए यह खतरनाक हो सकता है क्योंकि पार्टिकल हवा में बहना शुरू कर सकते हैं। मैंने तब खाना खाया, जब सभी ने खाना खत्म कर लिया, लाइटें बंद हो गई और ज्यादातर यात्री सो गए।

उन्होंने यह सलाह भी दी कि हवाईजहाज के बाथरूम खतरनाक हैं। आप ऐसी सतह छू सकते हैं, जिसे पहले किसी संक्रमित यात्री ने छुआ हो। और साथ ही किसी यात्री के बाथरूम से बाहर निकलने के तुरंत बाद ही आप अंदर न जाएं। कणों को स्थिर होने के लिए कम से कम एक मिनट दें, फिर अंदर जाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी प्लेन टॉयलेट वेस्ट को निकालने के लिए वैक्यूम विधियों का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए मैंने फ्लाइट में टॉयलेट इस्तेमाल ही नहीं किया।

इन सभी विज्ञानों के अलावा जहां भी संभव हो वहां यात्रियों से दूरी और पूरी यात्रा के दौरान मास्क पहने रहना भी कोरोना का जोखिम कम करता है। हालांकि, कोई भी व्यक्ति किसी चीज की गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन जब वह विभिन्न विशेषज्ञों से सुरक्षा उपायों के पीछे का विज्ञान समझता है, तो उन्हें सावधानी के साथ अपनाता है।

फंडा यह है कि हवाईयात्रा निश्चित रूप से सुरक्षित है, अगर आप अपनी यात्रा की शुरुआत से लेकर मंजिल तक पहुंचने से जुड़े हर कार्य में विज्ञान की समझ को लागू करते हैं।

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