नियम बनाते समय उनके उपयोग और दुरुपयोग का आंकलन भी करना जरूरी है क्योंकि बाज़ की नज़र रखने वाले लोग मौका नहीं चूकते

Management Funda by N. Raghuraman

नए -नए आज़ाद हुए भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री बी.वी. केसकर को 1952 में लगा कि शास्त्रीय संगीत ‘विलुप्त होने की कगार’ पर है, खासतौर पर उत्तर भारत में। स्वयं भारतीय शास्त्रीय संगीत के पुरोधा रहे केसकर मानते थे कि इससे उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहे युवा देश के सांस्कृतिक विकास में बाधा आएगी। इसलिए उन्होंने तय किया कि देश के मनोरंजन और जानकारी की जीवनरेखा ऑल इंडिया रेडियो पर फिल्मी गीत नहीं बजाए जाएंगे, क्योंकि वे बहुत ‘पाश्चात्य’ हैं। इनकी जगह उन्होंने विशुद्ध शास्त्रीय संगीत सुनाने का प्रस्ताव रखा।

इस अवसर के कारण श्रीलंका के तटों पर उदय हुआ रेडियो सिलोन का। इसने ‘बिनाका गीतमाला’ जैसे महान म्यूजिकल काउंटडाउन शो को जन्म दिया, जो भारतीय फिल्मी गीतों को समर्पित था। हर बुधवार ज्यादातर भारतीय श्रोता रेडियो सिलोन लगाकर अपने पसंदीदा होस्ट, प्रतिष्ठित अमीन सयानी के साथ, पसंदीदा गीत सुनते थे। अमीन श्रोताओं को फिल्मी किस्सों से बांधे रखते थे। बाकी इतिहास है। अगर आप जानना चाहते हैं कि मैंने आज 70 साल पुरानी कहानी से शुरुआत क्यों की, तो दूसरी कहानी पढ़ें और खुद दोनों कहानियां जोड़कर देखें।

यह किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। तमिलनाडु के रामानंतपुरम जिले के धनुषकोडी और वेधालई, नागपट्‌टीनम जिले के कोडियाक्करई से वेदारण्यम तक कुछ निर्जन इलाके लिट्‌टे के दिनों से ही तस्करी का सामान लाने, ले जाने के ठिकाने रहे हैं। यहां हाल ही में ऐसी गतिविधियां होने लगीं, जिन्हें देखकर लगता है कि मछुआरे गहरे समंदर में मछली पकड़ने जा रहे हैं। लेकिन कहानी कुछ और है। कई अंधेरी रातों में तमिलनाडु के 320 किमी लंबे तटों पर कई टन माल मछुआरों की नावों में चढ़ाया जा रहा है। फिर ये नावें अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं की ओर निकल पड़ती हैं, जो तमिलनाडु के पॉइंट कैलीमीर से 13 नॉटीकल मील दूर हैं।

तस्कर वाट्सएप पर डील करते हैं और लोकेशन व समय तय करते हैं। श्रीलंकाई तस्कर, भारतीय तस्करों को जीपीएस से ढूंढ लेते हैं। बीच समुद्र में ही माल का आदान-प्रदान हो जाता है। भारतीय तस्कर माल के बदले उसकी ही कीमत का सोना लेना पसंद करते हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि वे गांजा या अन्य प्रतिबंधित चीज की तस्करी कर रहे हैं तो आप भी वैसे ही हैरान रह जाएंगे, जैसे तमिलनाडु पुलिस हुई है। छापे के दौरान उन्हें हल्दी की गाठों से भरी बोरियां मिलीं। जी हां, अब हल्दी की गांठों की तस्करी हो रही है।

तमिलनाडु में एक किलो हल्दी की कीमत 90 से 150 रुपए है, जबकि यह श्रीलंका में 2000 से 4000 रुपए प्रतिकिलो बिक रही है। वर्जित चीजों के तस्कर भी इस बड़े फायदे के लालच में आ गए हैं। हल्दी न तो वर्जित है और न ही आवश्यक वस्तु के तहत आती है। पकड़े जाने पर तस्कर दावा करते हैं कि वे इसे स्थानीय स्तर पर बेचने ले जा रहे हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे के कार्यभार संभालने के लगभग एक महीने बाद, 21 दिसंबर 2019 बाद से शुरू हुई इस नई तस्करी के पीछे कारण यह है कि राष्ट्रपति ने हल्दी समेत कई मसालों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। अनुमान है कि श्रीलंका में 2000 टन घरेलू हल्दी उत्पादन होता है, जबकि कोरोना के बाद से खपत 7000 टन तक पहुंच गई है।

फंडा यह है कि जब नियम बनाए जाते हैं, तो उनके उपयोग और दुरुपयोग का आंकलन भी करना जरूरी है क्योंकि बाज़ की नज़र रखने वाले लोग मौका नहीं चूकते। अगर आप भी ऐसे हैं तो सकारात्मक अवसरों पर नज़र रखें- एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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