त्योहार का मौसम और बेहतर हो जाएगा, अगर हम स्थानीय आंत्रप्रेन्योर्स को प्रोत्साहित करें

Management Funda By N. Raghuraman

सड़क किनारे ठेलों-गुमटियों पर खाना और रास्ते के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाना हम सभी को पसंद था, लेकिन महामारी के बाद से हमने यह सब बंद कर दिया। इससे कई लोगों की आय का स्रोत खत्म हो गया है। हमने अपने घर में काम करने वालों से लेकर ड्राइवर तक, कई लोगों की मदद की है। अब जब देश धीरे-धीरे खुल रहा है, हम इस पर ध्यान दे रहे हैं कि नौकरी, बिजनेस आदि कैसे चलाए जाएं। लेकिन अब भी ऐसे हजारों लोग हैं, जिनकी जिंदगी विभिन्न कारणों से पटरी पर नहीं आ पाई है। ऐसे ही लोगों में शामिल थे दिल्ली के मालवीय नगर के बुजुर्ग दंपति।

अक्टूबर के पहले हफ्ते में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक बुजुर्ग दंपति रो रहा था और वीडियो बनाने वाला व्यक्ति उन्हें सांत्वना दे रहा था। वह दंपति उस गुमटी (स्टॉल) में 1988 से काम कर रहा था। उस व्यक्ति ने बताया कि ‘बाबा का ढाबा’ चलाने वाला यह दंपति खाना नहीं बेच पा रहा है। फिर उसने दंपति द्वारा बनाए गए व्यंजन दिखाए, जो स्वादिष्ट दिख रहे थे। फिर उसने गुमटी की जगह बताई और लोगों से वहां आने का निवेदन किया।

‘स्वाद ऑफिशियल’ नाम के यू-ट्यूब चैनल के इस वीडियो को सोशल साइट्स पर वसुंधरा तन्खा शर्मा ने इस कैप्शन के साथ शेयर किया, ‘इस वीडियो ने मेरा दिल तोड़ दिया।’ उन्होंने स्थानीय बिजनेस को सपोर्ट करने की बात करते हुए कहा- ‘दिल्ली वालों, प्लीज मौका मिले तो बाबा के ढाबा पर खाने जरूर जाइए।’ रवीना टंडन और सुनील शेट्‌टी जैसे बॉलीवुड सेलिब्रिटीज तक ने यह वीडियो शेयर किया, जिसपर 17 लाख से ज्यादा व्यूज थे। रवीना ने अपनी पोस्ट में कहा- ‘जो भी यहां खाए, मुझे फोटो भेजे। मैं आपकी तस्वीर के साथ एक प्यारा संदेश लिखूंगी।’ धीरे-धीरे पूरा दिल्ली और राजनेता भी बिक्री बढ़ाने पहुंचने लगे।

इस सोमवार बेंगलुरु के निवासियों ने भी ‘बाबा का ढाबा’ जैसा काम किया। बेंगलुरु में पौधे बेचने वाले 80 वर्षीय रेवाना सिद्दप्पा सिलिकॉन सिटी में लोगों के बीच चर्चित रहे। इन बुजुर्ग की तेज बारिश के बीच छाता लगाकर पौधे बेचते हुए तस्वीर ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुडा ने यह स्टोरी साझा कर मदद करने की गुजारिश की। एक अन्य यूजर शुभम जैन की पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, ‘बेंगलुरु, इन्हें जरा प्यार दें। ये वुलर फैशन फैक्टरी के सामने, जेपी नगर, सराक्की सिग्नल, कनाकापुरा रोड, बेंगलुरु में बैठते हैं।’ शुभम की पोस्ट को 4000 लाइक्स और 1500 शेयर मिले थे। कन्नड अभिनेत्री संयुक्ता होर्नाड, एक एनजीओ के साथ उस जगह पहुंची और सिद्दप्पा की मदद की। दिन के अंत में दानदाताओं की मदद से सिद्दप्पा के पास टेबल, कुर्सी और शामियाना था। अब उनके पास औषधीय पौधे बेचने की जानकारी देने वाला बोर्ड भी है।

केवल संपन्न लोग ही स्थानीय बिजनेस की मदद नहीं कर रहे। नौकरी तलाश रहे लोग भी ‘श्रमदान’ कर स्थानीय व्यापार की बचे रहने में मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान ओडिशा लौटे सैकड़ों नौकरीहीन प्रवासी मजदूरों ने पिछले दो हफ्तों में अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर रुशिकुल्या नदी के मुहाने पर 200 मीटर की खुदाई की, ताकि भारी बारिश के बाद खेतों में जमा हुए बाढ़ के पानी को निकाला जा सके। रुशिकुल्या ज्यादातर दक्षिणी ओडिशा के गंजम जैसे जिलों में बहती है और उनके करीब 2 किमी क्षेत्र में बारिश के बाद गाद का जमाव हो गया था। कामगारों को अहसास हुआ कि अगर वे ग्रामीणों की मदद नहीं करेंगे, तो फसल खराब हो जाएगी, जिससे खाने की कीमतें बढ़ेंगी।

फंडा यह है कि त्योहार का मौसम और बेहतर हो जाएगा, अगर हम स्थानीय आंत्रप्रेन्योर्स को प्रोत्साहित करें और अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे अगले स्तर पर ले जाने में उनकी मदद करें।

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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