जब आप किसी प्रतिस्पर्धा में हों, चाहे मैच हो या जॉब इंटरव्यू, अपनी बॉडी लैंग्वेज पर नियंत्रण करने की कला सीखें

एक अरसे बाद लाइव स्पोर्ट्स हो रहे हैं, पिछले शनिवार से यूएई में आईपीएल मैचे खेले जा रहे हैं। मैं सारे खेल देखता हूं क्योंकि मेरी युवा ऑडियंस भी इसे देखती है व सेमिनार्स में उन्हें बताने के लिए मुझे यहां से कई मैनेजमेंट उदाहरण मिलते हैं। रविवार रात आईपीएल के इस सीजन के रोमांच से भरे दूसरे ही मैच में मुझे एक मैनेजमेंट लेसन मिला। किंग्स इलेवन पंजाब और दिल्ली केपिटल्स के बीच एकतरफा सुपरओवर में खत्म हुआ मैच बॉडी लैंग्वेज की दम पर जीता गया!

किंग्स इलेवन के 55 पर 5 विकेट से मयंक अग्रवाल बल्लेबाजी में हीरो बनकर उभरे (7 चौके व 4 छक्कों की बदौलत 60 गेंदों पर 89 रन बनाए) और अपनी टीम को जीत की दहलीज तक ले गए। अब 3 बॉल में सिर्फ 1 रन बनाने के साथ मैच लगभग मयंक की झोली में था। मैच देख रहे लोग कॉमेन्टेटर को कहते हुए सुन सकते थे, ‘हमें देखना होगा कि क्या मयंक बॉल को पुश करके एक रन दौड़ेंगे या बड़ी हिट के साथ मैच खत्म करेंगे।’ पर मैंने अपने परिवार को कह दिया था कि वह हिट करेगा। उसकी बॉडी लैंग्वेज में आक्रामकता के सारे लक्षण दिख रहे थे।

पहली डॉट बॉल थी। अब मयंक को दो गेंदों पर सिर्फ एक रन बनाना था। सारे गेंदबाज़ों को खेल चुके बल्लेबाज के लिए यह नामुमकिन नहीं था। पर मयंक ने अपने हाव-भाव में ज्यादा आक्रामकता दिखाई, जिसे सिर्फ मैंने ही नहीं दिल्ली केपिटल्स के गेंदबाज मार्कस स्टोइनिस ने भी पढ़ लिया। उसने फुलटॉस फेंकी और मयंक ने सीधा कैच डीप बैकवर्ड पॉइंट पर खड़े शिमरॉन हेटमायर के हाथ में थमा दिया।

चूंकि अधिकांश फील्डर विकेट के आसपास थे, स्टोइनिस को पता था कि एक रन बनाने के लिए अगले बल्लेबाज निकोलस पूरन को हिट करना पड़ेगा, उसने फिर से फुलटॉस फेंकी, पूरन ने उम्मीद के मुताबिक शॉट मारा और कैच थमाने के साथ ही मैच टाइ हो गया। और तब सुपरओवर शुरू हुआ, जहां किंग्स इलेवन मयंक की बल्लेबाजी का फायदा नहीं उठा सका और दिल्ली केपिटल्स से हार गई।

जीत की दहलीज पर खड़े होकर जीत से चूक जाने की यह असली कहानी है! अगर इस मैच की विश्लेषण रिपोर्ट बनाने को कहा जाए, तो मैं 1960 में बॉडी लैंग्वेज़ के अग्रणी शोधकर्ता व मनोविज्ञान के प्रोफेसर एमेरिटस अल्बर्ट मेहराबियन का जिक्र करूंगा, जिन्होंने संचार के 3 सिद्धांत बताए हैं : 1. कंटेंट (7%) 2. आवाज़ की टोन(38%) और 3. बॉडी लैंग्वेज (55%)। मेहराबियन ने कहा था कि इनमें से अमौखिक संचार बॉडी लैंग्वेज का, संदेश प्राप्त होने में और यहां तक कि किसी को कितना पसंद किया जा रहा है, इसमें भी सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। बॉडी लैंग्वेज, विशेषकर पॉश्चर आपके मूड व सोच को अवचेतन अवस्था में ही सामने वाले को बता देती है। ठीक वैसे ही स्टोइनिस ने मयंक की बॉडी लैंग्वेज पढ़ ली। अगर आप एमएस धोनी को देखें, तो उनकी बॉडी लैंग्वेज पढ़ना मुश्किल है।

इंटरव्यू में किसी के सामने अगर आप कहते हैं कि आप मिलनसार हैं और नर्वसनेस में हाथों को हिला रहे हैं, नज़रें नहीं मिला रहे हैं, तब साक्षात्कारकर्ता जान जाता है कि आपके शब्द आपके एक्शन से मेल नहीं खाते हैं। बॉडी लैंग्वेज सॉफ्ट स्किल्स की पूरक है, जिसकी आज के ग्लोबल एंप्लॉयमेंट मार्केट में बड़ी कद्र है। लिंक्डइन की 2019 की ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है, जिसमें कहा गया है कि 92 फीसदी टैलेंट प्रोफेशनल और हायरिंग करने वाले मैनेजर्स आवेदकों के मजबूत सॉफ्ट स्किल्स को महत्वपूर्ण मानते हैं।

फंडा यह है कि जब आप किसी प्रतिस्पर्धा में हों, चाहे मैच हो या जॉब इंटरव्यू, अपनी बॉडी लैंग्वेज पर नियंत्रण करने की कला सीखें।

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