‘META’ पद्धति के सही इस्तेमाल से किसी की जान भी बचा सकते हैं

Management Funda by N. Raghuraman

इस सबकी शुरुआत इस गुरुवार रात के 10.35 बजे हुई, जब मुंबई पुलिस को ट्विटर अकाउंट पर एक टिप मिली कि एक महिला अपनी ज़िंदगी खत्म करने जा रही है। 38 वर्षीय यह महिला मुंबई में अकेली रह रही थी और मुंबई पुलिस जानती थी कि इस मामले को सुबह तक के लिए नहीं छोड़ सकते। उन्होंने ट्वीट करने वाले व्यक्ति से संपर्क किया। वह कोलकाता में था, मुंबई में यह उसकी भतीजी थी। अगर आप सोच रहे हैं कि चूंकि पुलिस ने उस व्यक्ति से संपर्क कर लिया था, तो उस महिला को खोजना भी आसान रहा होगा, तो आप गलत हैं।

अंकल नहीं जानते थे कि भतीजी कहां रहती है। उनके पास सिर्फ बिल्डिंग की तस्वीर थी, जहां वह रह रही थी, यह उसने उनकी पत्नी को भेजी थी। सोसायटी के कुछ लोग कोविड पॉजिटिव थे, इसलिए इसके गेट पर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश निषेध वाला नगर निगम का नोटिस लगा था। पृष्ठभूमि में, उसकी इमारत का कुछ हिस्सा दिख रहा था। यह तिरुपति बालाजी में मुंडन किए व्यक्ति को ढूंढने जैसा था! निगम के नोटिस के साथ तस्वीर में दिख रही इमारत जैसी मुंबई में हजारों इमारतें होंगी। याद रखें इस शुक्रवार को मुंबई देश का पहला शहर बन गया है, जहां कोविड से मरने वालों की संख्या 10 हजार पार कर गई है।

आप सोच रहे होंगे कि जब वह उनके संपर्क में आई, तो अंकल के पास निश्चित तौर पर भतीजी का मोबाइल नंबर होगा। हां पुलिस के पास उसका नंबर था। पर समस्या यह थी कि पुलिस जानती थी कि ऐसी मनोस्थिति में फोन करना जोखिम भरा हो सकता है। पुलिस की आवाज़ सुनते ही लोग आमतौर पर घबरा जाते हैं। नाजुक समय में यह उन्हें खतरे की ओर ढकेल सकता है। तब पुलिस ने उनसे, माता-पिता के जरिए पता मांगने को कहा। पर उन्हें बताया गया कि उसके पैरेंट्स पहले ही अलग हो चुके हैं और पारिवारिक कारणों से उन्होंने उसके साथ सारे रिश्ते तोड़ दिए हैं।

अब पुलिस के पास सिर्फ मोबाइल लोकेशन पता लगाने का ही रास्ता बचा था। पर लोकेशन भी बार-बार बदल रही थी, टावर्स से सिग्नल आने-जाने से ऐसा अक्सर होता है। हालांकि पुलिस ने उस उपनगर, कुर्ला ईस्ट का पता लगा लिया, जहां वह रह रही थी। यह मुंबई का सबसे ज्यादा जनसंख्या और भीड़भाड़ वाला इलाका है।

तेजी से भागते समय के बीच पुलिस ने कुर्ला के आसपास पेट्रोलिंग कर रही टीम से बिल्डिंग की तस्वीर शेयर की। 11.45 पर एक कॉन्स्टेबल ने कॉलोनी में कई बड़ी बिल्डिंग के बीच खिड़कियों की डिजाइन से उस बिल्डिंग की पहचान की। काउंसलर समेत पुलिस टीम जल्दी निकली और 12.05 पर उस जगह पहुंच गए। कोलकाता से अलर्ट मिले हुए डेढ़ घंटा पहले ही बीत चुका था। और अभी भी वह लोकेशन को लेकर आश्वस्त नहीं थे। क्योंकि वहां की 20 इमारतें फोटो जैसी ही दिख रही थीं।

महिला का नाम सुनकर भी सुरक्षा गार्ड के दिमाग की घंटी नहीं बजी। अचानक अंकल ने फोन पर सुराग दिया कि उसके पास पालतू कुत्ता है। उस एक सुराग ने पुलिस टीम को रात के 1.30 बजे उसके घर पहुंचा दिया। दरवाज़ा खटखटाया गया और काउंसलर ने शांति सेे मामला संभाल लिया। रात के 2.30 बजे भतीजी की आवाज़ सुनकर अंकल को राहत मिली। पुलिस जब उस जगह से गई, तो एक गर्व था क्योंकि उन्होंने ‘मेटा’ पद्धति प्रयोग की थी, गेमिंग की दुनिया में जिसे प्रचलित रूप से (META)‘ Most Effective tactic available’ (उपलब्ध सबसे प्रभावी रणनीति) नाम से जाना जाता है।

फंडा यह है कि जब आप ‘मेटा’ पद्धति का सही इस्तेमाल करते हैं, तो ज्यादातर सफल होते हैं। -एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

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