यह अकादमिक वर्ष पेरेंट्स के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु मैं ऐसे बच्चे को जानता हूं जो खुश था कि उसे स्कूल नहीं जाना पड़ता और स्कूल रोज उसके पास आता है। चूंकि स्कूल आने-जाने का समय बचने लगा, उसने सोने के लिए अतिरिक्त समय की नई मांग की, जिसे माता-पिता को मानना पड़ा। यह उसके आलस की शुरुआत थी। जब … Read more

हर पेशेवर को कानून के पीछे की भावना पता हो

‘एक बेगुनाह को सज़ा मिलने से बेहतर है 10 गुनहगारों का छूट जाना।’ यह कथन 19वीं सदी की शुरुआत में कहावत बन गया था, जिसे कई देशों ने आम कानून में अपनाया और बाद में यह मानक सिद्धांत बन गया, जिसे 21वीं सदी में कानून के छात्रों को याद कराया जाने लगा। याद रखें कि … Read more

2021 में हमने जिंदगी जीने का नया ‘संविधान’ तैयार कर जीवनशैली को नए स्तर पर पहुंचा दिया है

N. Raghuraman

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु ज नवरी 26, 1950 को भारत का संविधान अस्तित्व में आया। इसने भारत को चलाने वाले दस्तावेज ‘भारत सरकार अधिनियम 1935’ की जगह ली और हमारा देश एक नया गणतंत्र बना। अब 2021 में आकर जब हम मुश्किल में बीते 10 महीने को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि … Read more

2020 में ‘पॉजीटिव’ शब्द ने भले ही हमें डराया हो, लेकिन यह हमारी जिंदगी का आधार है

N. Raghuraman

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु ‘पॉजीटिव’ 2020 में सबसे ‘निगेटिव’ शब्द था। शायद पहली बार लोग ‘पॉजीटिव’ शब्द से इतना डरे हुए थे। फिर भी वे घर में रहते हुए सकारात्मक बने रहे। लेकिन इसने उन्हें कुछ नया करने से नहीं रोका। उन्होंने अजीब व्यजंन बनाए, कम से कम नाम तो ऐसे ही थे। कुछ लोगों … Read more

अवसर और चुनौतियों का गठजोड़ रहेगा नया वर्ष, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लोगों के पंखों को मिल सकती है उड़ान

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं। पिछले 10 महीनों में टीवी के सामने बैठकर रियलिटी शो देखते हुए कई लोगों ने सोचा होगा कि वे भी इनका हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन हम जानते हैं कि इतना बड़ा देश होने के कारण शोज में जगह कम है। कुछ लोगों ने … Read more

तलाक के बढ़ते मामलों के बीच हमारे लिए फैसला लेने का समय आ गया है कि क्या हमें शादी के कोर्स की जरूरत है या नहीं

N. Raghuraman

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु सोमवार की रात मैं पत्नी के साथ एक वकील मित्र के घर लगभग दो साल बाद डिनर के लिए गया था। हम जैसे ही अंदर गए, पड़ोसियों ने झांककर देखा कि हम कौन थे। मुंबई में आमतौर पर ऐसा नहीं होता। मैंने कभी इस शहर को पड़ोसियों के मेहमानों की परवाह … Read more

जरूरतों और चाहतों के बीच के अंतर को सिर्फ कॉर्पोरेट ही नहीं समझे हैं, बल्कि बुजुर्ग भी कॉर्पोरेट के रास्ते पर चल पड़े हैं

N. Raghuraman

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु साल 2020 कई लोगों के लिए मुश्किल रहा है। कॉर्पोरेट से लेकर आम लोगों तक को बाधाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन अगर इस साल को अलग नजरिए से देखें तो पाएंगे कि इसने अर्थशास्त्र के कई सबक सिखाए हैं, जिनका संबंध ‘जरूरत’ और ‘चाहत’ जैसे सामाजिक विज्ञान से है। ‘जरूरतें’ … Read more

कभी-कभी खुद को सांता क्लॉज की टीम का सदस्य मानें और जान-पहचान वालों या अनजान लोगों की विशलिस्ट पता करें

Diwali Gift

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु जब मेरी बेटी छोटी थी तो ऐसा कोई साल नहीं गुजरता था, जब मैं उसके बिस्तर के पास लटके लाल मोज़े में कोई सरप्राइज गिफ्ट न रखूं। मैं उसके उन नियमित सवालों का जवाब नहीं दे पाता था जो इसके इर्द-गिर्द होते थे कि ‘क्या सांता असली है?’ मैं उसे ऐसी … Read more

‘मां की पाठशाला’ मॉडल ही सही मायनों में आत्मनिर्भर भारत की पहचान है

Funda by N. Raghuraman

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु क्या आपने कभी कल्पना की है कि गांव की एक गरीब मां आईएएस कैडर के किसी सरकारी अधिकारी को उसके निजी मोबाइल पर फोन कर कह सकती है कि ‘मैं फलां गांव से बोल रही हूं, हमारे बच्चे खेल-खेलकर थक चुके हैं, अब वे कुछ समय पढ़ना चाहते हैं, क्या आप … Read more

प्रेम की गुणवत्ता इस दुनिया की किसी भी चीज को परास्त कर सकती है

N. Raghuraman

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु इस हफ्ते मेरी एक फ्लाइट के दौरान, एक दो वर्षीय बच्ची बिजनेस क्लास में अपनी मां की गोद में बैठी थी। एविएशन की भाषा में ये शिशु कहलाते हैं और इन्हें सीट नहीं मिलती। जब उसकी मां को उसका और बच्ची का खाना परोसा गया, बच्ची बर्तनों से खेलती रही लेकिन … Read more